बचपन की यादें
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"सुना है मैनें पापा से मैं बचपन से ही थोड़ी बड़ी हो गयी थी चाह नही थी जिसे खिलौनो कि मै उनकी वो गुड़िया हो गयी थी दूर हो गयी थी मैं बचपन के वादियो से अपने अकेलेपन कि दुनिया से कुछ इस कदर लिपट गयी थी अपने बचपन से अनभिज्ञ,शायद जिन्दगी की तलाश में कहीं खो सी गयी थी जिद थी इस दुनिया को जानने की और असली खुशियों को पहचानने की शायद इसीलिए मै बचपन के खूबसूरत से एहसास से दूर सी हो गयी थी दादी की कहानियों के उस दौर मे मैं जिन्दगी की खुद में उलझी सी एक पहेली हो गयी थी सुना है मैनें पापा से मैं बचपन से ही थोड़ी बड़ी हो गयी थी। #NojotoQuote"

सुना है मैनें पापा से 
मैं बचपन से ही थोड़ी बड़ी हो गयी थी
चाह नही थी जिसे खिलौनो कि मै उनकी वो गुड़िया हो गयी थी
दूर हो गयी थी मैं बचपन के वादियो से 
अपने अकेलेपन कि दुनिया से कुछ इस कदर लिपट गयी थी 
अपने बचपन से अनभिज्ञ,शायद जिन्दगी की तलाश में
कहीं खो सी गयी थी
जिद थी इस दुनिया को जानने की 
और असली खुशियों को पहचानने की 
शायद इसीलिए मै बचपन के खूबसूरत से एहसास से दूर सी हो गयी थी
दादी की कहानियों के उस दौर मे 
मैं जिन्दगी की खुद में उलझी सी एक पहेली हो गयी थी
सुना है मैनें पापा से
 मैं बचपन से ही थोड़ी बड़ी हो गयी थी।

 #NojotoQuote

बचपन से अनभिज्ञ ।
#Nojoto#Nojotohindi#बचपन#Jindagi#Poetry#बालदिवस#ehsas#Truth#Zid#duniya#kavishala#kalakaksh#

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"#NojotoVideo"

#NojotoVideo

"फिर से मैं वही बचपन खोज लाई हूँ
तलाश तो खुद की थी पर आप सब का बचपन साथ लाई हूँ....😇😍😍
मेरे और मेरे nojoto writer दोस्तों का प्यारा सा बचप

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"इबादत की क़ुबूलियत का बस यही जुमला है मुकब्बिर साहब कि बंदिगी में बन्दे का ज़िक्र नहीं होता और बन्दे से बंदिगी का ज़िक्र नहीं होता"

इबादत की क़ुबूलियत का बस यही जुमला है मुकब्बिर साहब

कि बंदिगी में बन्दे का ज़िक्र नहीं होता
और बन्दे से बंदिगी का ज़िक्र नहीं होता

#NojotoHindi #ibadat #Bandigi #बचपन #thought #Poetry #Quotes #kalakaksh #TST #Nojoto

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"Happy Childrens Day अलग-अलग डाली के फूल हैं सारे जिनमें कला के विभिन्न रंग निराले कितने सुन्दर ! कितने प्यारे ! नोजोटो के ये टिमटिमाते तारे nojoto परिवार के सभी बच्चों को बाल-दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ"

Happy Childrens Day अलग-अलग डाली के फूल हैं सारे
जिनमें कला के विभिन्न रंग निराले
कितने सुन्दर ! कितने प्यारे !
नोजोटो के ये टिमटिमाते तारे

                  nojoto परिवार के सभी बच्चों को
                बाल-दिवस
                की 
                 हार्दिक शुभकामनाएँ

#बालदिवस #Nojoto #Nojotohindi #kalakaksh #kavishala #TST #बचपन #kiranbala

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"आज का बचपन जाने कहाँ खोगया है अस्तित्व इसका कम्प्यूटर में विलीन हो गया है जो विचरता था खुले आसमान के नीचे जो खेलता था पवन की मस्त मौजों से फैलाकर बाहें समेट लेता था जहाँ की सारी खुशियाँ बढ़ाकर हाथ छू लेता था आँसमान की बुलंदियाँ जो झगड़ता था, रूठता था, मानाता था, हंसता था, रोता था, खेलता था साथ अन्य बचपनों के जो कहता था अपनी भावनाओ को अपने अपार मित्रों के समूहों से भावनाओं का वह समंदर आज सिमट कर एक बूँद हो गया है। आज का बचपन...........................विलीन हो गया है हो गया है कैद एक बंद कमरे में हो रहा आहत ए.सी., कूलर,पंखे की हवा के थपेड़ों से फैलाकर बाँह एकांत,उदासी मायूसी समेटता है बड़ाकर हाथ रिमोट और कीपैड के बटनों को दबोचता है। हाँ उड़ता है-3, आज वो अंतरिक्ष की असीम ऊँचाईयों में पर कहाँ कंम्पयूटर के बंद डिब्बे में आज इसके रिश्ते मित्र टी.वी. कंम्प्यूटर, वीडियो गेम है। ये आधुनिक बचपन है जो मशीन हो गया है जो भावना हीन, उमंगहीन हो गया है। आज का बचपन................. ........विलीन हो गया है। उठो जागो 'ए बचपन' इस चिरनिन्द्रा से और समेटो और जुड़ जाओ मित्रों के समूहों से उड़ो आकाश में, साँस लो खुली हवा में फैलाकर बांह बढ़ाकर हाथ जीवित कर दो दफ्न बचपन को नई उड़ान, नई उमंग,नई मुस्कान दो प्रौण हो चले भारत को। और लौटा दो पुर्न बचपन भारत का भारत को । पारुल शर्मा"

आज का बचपन जाने कहाँ खोगया है
अस्तित्व इसका कम्प्यूटर में विलीन हो गया है
जो विचरता था खुले आसमान के नीचे
जो खेलता था पवन की मस्त मौजों से
फैलाकर बाहें समेट लेता था जहाँ की सारी खुशियाँ 
बढ़ाकर हाथ छू लेता था आँसमान की बुलंदियाँ
जो झगड़ता था, रूठता था, मानाता था, हंसता था,
रोता था, खेलता था साथ अन्य बचपनों के
जो कहता था अपनी भावनाओ को अपने अपार मित्रों के समूहों से
भावनाओं का वह समंदर आज सिमट कर एक बूँद हो गया है।
आज का बचपन...........................विलीन हो गया है
हो गया है कैद एक बंद कमरे में
हो रहा आहत ए.सी., कूलर,पंखे की हवा के थपेड़ों से
फैलाकर बाँह एकांत,उदासी मायूसी समेटता है
बड़ाकर हाथ रिमोट और कीपैड के बटनों को दबोचता है।
हाँ उड़ता है-3, आज वो अंतरिक्ष की असीम ऊँचाईयों में
पर कहाँ कंम्पयूटर के बंद डिब्बे में
आज इसके रिश्ते मित्र टी.वी. कंम्प्यूटर, वीडियो गेम है।
ये आधुनिक बचपन है जो मशीन हो गया है
जो भावना हीन, उमंगहीन हो गया है।
आज का बचपन................. ........विलीन हो गया है।
उठो जागो 'ए बचपन' इस चिरनिन्द्रा से
और समेटो और जुड़ जाओ मित्रों के समूहों से
उड़ो आकाश में, साँस लो खुली हवा में
फैलाकर बांह बढ़ाकर हाथ जीवित कर दो दफ्न बचपन को
नई उड़ान, नई उमंग,नई मुस्कान दो प्रौण हो चले भारत को।
और लौटा दो पुर्न बचपन भारत का भारत को ।
                     पारुल शर्मा

आज का बचपन जाने कहाँ खोगया है
अस्तित्व इसका कम्प्यूटर में विलीन हो गया है
जो विचरता था खुले आसमान के नीचे
जो खेलता था पवन की मस्त मौजों से

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