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"वो पंछी (part -1) वो पंछी जो पिंजरे में बंद है इस गुलामी से निकलना चाहता है By :-Akshita jangid (poetess)"

वो पंछी (part -1)

वो पंछी जो पिंजरे में बंद है 
 इस गुलामी से निकलना चाहता है 

By :-Akshita jangid 
  (poetess)

वो पंछी जो पिंजरे में बंद है
इस गुलामी से निकलना चाहता है
वो भी बाहर की सुन्दर दुनिया को देखना चाहता है
अपने हिसाब से जीना चाहता है,

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"अरसे बाद जो ख्वाब उसका सजाया है उसी में, अब ठहर जाना चाहती हूँ | जाना तो उसे भी है, पर इससे पहले शब्दों में उसे केद कर लेना चाहती हूँ | कल का ख्याल कुछ और होगा ,पर आज को खास बना लेना चाहती हूँ | उसकी की हुई हर एक बात को,पन्नों पर अब उतार लेना चाहती हूँ | आंखे नम कल होंगी, पर यादें उसकी सिमेट लेना चाहती हूँ | पढ़कर उसको खुश हो जाऊ बस, इतना ही उसको लिखना चाहती हूँ | By:-Akshita Jangid (poetess)"

अरसे बाद जो ख्वाब उसका सजाया है 
उसी में, अब ठहर जाना चाहती हूँ |

जाना तो उसे भी है, पर इससे पहले 
शब्दों में उसे केद कर लेना चाहती हूँ |

कल का ख्याल कुछ और होगा ,पर 
आज को खास बना लेना चाहती हूँ |

उसकी की हुई हर एक बात को,पन्नों 
पर अब उतार लेना चाहती हूँ |

आंखे नम कल होंगी, पर यादें 
उसकी सिमेट लेना चाहती हूँ |

पढ़कर उसको खुश हो जाऊ बस,
 इतना ही उसको लिखना चाहती हूँ |

By:-Akshita Jangid 
(poetess)

अरसे बाद जो ख्वाब उसका सजाया है
उसी में, अब ठहर जाना चाहती हूँ |

जाना तो उसे भी है, पर इससे पहले
शब्दों में उसे केद कर लेना चाहती हूँ |

41 Love

Akshita Jangid(poetess)'s Stories in 2018
#Throwback2018

Akshita Jangid(poetess) की कहानियाँ 2018 में
#लम्हें2018 #Nojoto2018

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Akshita jangid

(एक लफ़्ज पिता के लिये)



एक प्यारा मुस्कुराता चेहरा
हजारो दुख छियाये रखता

48 Love

"आसमां छूने की तमन्ना नहीं,मैं तो सिर्फ दिल तक पहुँचना चाहती हूँ। कुछ अपनी रही अधूरी कहानी को, बस लिखकर पूरा करना चाहती हूँ। इश्क़ का दस्तूर तो हो चुका,अब तो सिर्फ उसे मुकम्मल करना चाहती हूँ। होने को तो सब देख लिया, अब तो कुछ अलग देखना चाहती हूँ। पहचान उसकी, संग अपने करके, उसका भी एक नाम करना चाहती हूँ। आसमां छूने की तमन्ना नहीं,मैं तो सिर्फ दिल तक पहुँचना चाहती हूँ। By:- Akshita Jangid (Poetess) #NojotoQuote"

आसमां छूने की तमन्ना नहीं,मैं तो
सिर्फ दिल तक पहुँचना चाहती हूँ।

कुछ अपनी रही अधूरी कहानी को,
बस लिखकर पूरा करना चाहती हूँ।

इश्क़ का दस्तूर तो हो चुका,अब तो
सिर्फ उसे मुकम्मल करना चाहती हूँ।

होने को तो सब देख लिया, अब तो
कुछ अलग देखना चाहती हूँ।

पहचान उसकी, संग अपने करके, उसका
भी एक नाम करना चाहती हूँ।

 आसमां छूने की तमन्ना नहीं,मैं तो
 सिर्फ दिल तक पहुँचना चाहती हूँ।

By:- Akshita Jangid
(Poetess) #NojotoQuote

आसमां छूने की तमन्ना नहीं,मैं तो
सिर्फ दिल तक पहुँचना चाहती हूँ।

कुछ अपनी रही अधूरी कहानी को,
बस लिखकर पूरा करना चाहती हूँ।

इश्क़ का दस्तूर

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