याद करती हुँ...
जब वो नादानियाँ,
मुझे महका जाती है

याद करती हुँ... जब वो नादानियाँ, मुझे महका जाती है

याद करती हुँ... जब वो नादानियाँ, मुझे महका जाती है... वो क्रीड़ा और अठखेलियाँ, हर दिवारों में दफन है... बचपन की शैतानियाँ। वो भी किया दिन थे... अजनबी थी दुनियादारियाँ, हसीन अहसासों से... महक रही हैं क्यारियाँ, किस्से और कहानियों में है... बचपन की शैतानियाँ। मनोहर था वो जमाना... माँ का आंचल पापा की लोरियाँ, पल में रूठना पल में मान जाना... शताती थी हमारी धमाचौकड़ियाँ, संजोए रखी है वो निशानियाँ... बचपन की शैतानियाँ॥ #gif बचपन की शैतानियाँ #nojoto #poetry#बचपन#शैतानियाँ याद करती हुँ... जब वो नादानियाँ, मुझे महका जाती है... वो क्रीड़ा और अठखेलियाँ, हर दिवारों में दफन है... बचपन की शैतानियाँ। वो भी किया दिन थे... अजनबी थी दुनियादारियाँ, हसीन अहसासों से... महक रही हैं क्यारियाँ, किस्से और कहानियों में है... बचपन की शैतानियाँ। मनोहर था वो जमाना... माँ का आंचल पापा की लोरियाँ, पल में रूठना पल में मान जाना... शताती थी हमारी धमाचौकड़ियाँ, संजोए रखी है वो निशानियाँ... बचपन की शैतानियाँ॥. Also Read about .

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