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"हो जिस्म की तलब सिर्फ, तो मोहब्बत मत करना उसकी रुह में जो न उतर सको , तो मोहब्बत मत करना मिलती नहीं इतनी बड़ी दौलत उजलत में, गर इंतेज़ार न कर सको, तो मोहब्बत मत करना वफ़ा की छाओं में तो चल लेते हैं सभी, जो उसकी बेवफाई के अंगारों पे चल सको, तो मोहब्बत मत करना माना वस्ल में रक़्स करने का है मज़ा अपना, मगर जो उसके हिज्र में फना न हो सको, तो मोहब्बत मत करना ये रानाई जो है, है मेहमान कूछ वक़्त की, जो उसकी शोख़-मिजाज़ी पे न मर सको, तो मोहब्बत मत करना फरेबी इस दौर में लगते देखें हैं मैंने अंबार वादों के, जो वादा-परस्त न बन सको, तो मोहब्बत मत करना यूं तो कहने को हैं शहर में मयखाने तमाम 'प्रतुंज', जो उसकी मयगूँ निगाहों से न पी सको, तो मोहब्बत मत करना"

हो जिस्म की तलब सिर्फ, तो मोहब्बत मत करना
उसकी रुह में जो न उतर सको , तो मोहब्बत मत करना

मिलती नहीं इतनी बड़ी दौलत उजलत में,
गर इंतेज़ार न कर सको, तो मोहब्बत मत करना

वफ़ा की छाओं में तो चल लेते हैं सभी,
जो उसकी बेवफाई के अंगारों पे चल सको, तो मोहब्बत मत करना

माना वस्ल में रक़्स करने का है मज़ा अपना,
मगर जो उसके हिज्र में फना न हो सको, तो मोहब्बत मत करना

ये रानाई जो है, है मेहमान कूछ वक़्त की,
जो उसकी शोख़-मिजाज़ी पे न मर सको, तो मोहब्बत मत करना

फरेबी इस दौर में लगते देखें हैं मैंने अंबार वादों के,
जो वादा-परस्त न बन सको, तो मोहब्बत मत करना

यूं तो कहने को हैं शहर में मयखाने तमाम 'प्रतुंज',
जो उसकी मयगूँ निगाहों से न पी सको, तो मोहब्बत मत करना

तो मोहब्बत मत करना #nojotohindi #nojotourdu #mohabbat #mohabbat_ki_baazi

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