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"वो उसका बचपना जो मुझको पसंद था, कहीं खो सा गया। ढेरों बातें करती थी, मनाने से भी ना रुकती थी वो रवैया उसका, कहीं खो सा गया। रूट जाऊं तो मनाने आती, दूर भगाऊँ तो रोने लग जाती वो मासूमियत उसकी, कहीं खो सी गई। झूठ बोलकर अपनी मां से, मुझसे छुट्टी के दिन भी मिलने आती वो खुदगर्ज़ी उसकी मेरे लिए, कहीं खो सी गई। वो उसका ज़िद्द करना, फिर १० रुपए की चॉकलेट से ही मान जाना वो भोलापन उसका, कहीं खो सा गया। वो उसका मेरे लिए चिंता करना, रात भर जाग-जाग कर मेरा हाल पूछना वो प्यार उसका, कहीं खो सा गया। कहीं खो सा गया।।"

वो उसका बचपना जो मुझको पसंद था,
कहीं खो सा गया।
ढेरों बातें करती थी, मनाने से भी ना रुकती थी
वो रवैया उसका,
कहीं खो सा गया।
रूट जाऊं तो मनाने आती, दूर भगाऊँ तो रोने लग जाती
वो मासूमियत उसकी,
कहीं खो सी गई।
झूठ बोलकर अपनी मां से, मुझसे छुट्टी के दिन भी मिलने आती
वो खुदगर्ज़ी उसकी मेरे लिए,
कहीं खो सी गई।
वो उसका ज़िद्द करना, फिर १० रुपए की चॉकलेट से ही मान जाना
वो भोलापन उसका,
कहीं खो सा गया।
वो उसका मेरे लिए चिंता करना, रात भर जाग-जाग कर मेरा हाल पूछना
वो प्यार उसका,
कहीं खो सा गया।
कहीं खो सा गया।।

"कहीं खो सा गया" वो उसका बचपना जो मुझको पसंद था,
कहीं खो सा गया।
ढेरों बातें करती थी, मनाने से भी ना रुकती थी
वो रवैया उसका,
कहीं खो सा गया।
रूट जाऊं तो मनाने आती, दूर भगाऊँ तो रोने लग जाती
वो मासूमियत उसकी,
कहीं खो सी गई।

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