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"चलो आज इक काम करते हैं बिना छुए तुमसे मोहब्बत तमाम करते हैं ना कोई स्पर्श, ना कोई विमर्श आँखों हीं आँखों में, एहसासों को सरे-आम करते हैं रुक जाओगे, ग़र मेरी बातें सुनकर हीं कुछ ऐसी बातों से, सुबह को शाम करते हैं कुछ तकल्लुफ़ सी होगी तुम्हें हया से नज़रें नीची, तेरे होठों पे मुस्कान करते हैं कशमकश में ठहरा होगा पल शिकन चेहरे पर, दिल में डर को मकान करते हैं पास आने की ख़्वाहिशें जो जल रही शाम भी ढल रही, ख़ामोशी को अब तूफ़ान करते हैं"

चलो आज इक काम करते हैं
बिना छुए तुमसे मोहब्बत तमाम करते हैं

ना कोई स्पर्श, ना कोई विमर्श
आँखों हीं आँखों में, एहसासों को सरे-आम करते हैं

रुक जाओगे, ग़र मेरी बातें सुनकर हीं
कुछ ऐसी बातों से, सुबह को शाम करते हैं

कुछ तकल्लुफ़ सी होगी तुम्हें
हया से नज़रें नीची, तेरे होठों पे मुस्कान करते हैं

कशमकश में ठहरा होगा पल
शिकन चेहरे पर, दिल में डर को मकान करते हैं

पास आने की ख़्वाहिशें जो जल रही
शाम भी ढल रही, ख़ामोशी को अब तूफ़ान करते हैं

चलो इक काम करते हैं चलो आज इक काम करते हैं
बिना छुए तुमसे मोहब्बत तमाम करते हैं

ना कोई स्पर्श, ना कोई विमर्श
आँखों हीं आँखों में, एहसासों को सरे-आम करते हैं

रुक जाओगे, ग़र मेरी बातें सुनकर हीं
कुछ ऐसी बातों से, सुबह को शाम करते हैं

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