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"हादसों की ज़द में हैं तो क्या मुस्कुराना छोड़ दें जलजलों के खौफ से क्या घर बनाना छोड़  #gif"

हादसों की ज़द में हैं तो क्या मुस्कुराना छोड़ दें

जलजलों के खौफ से क्या घर बनाना छोड़ 

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"अभी-अभी तो धधक रहे थे, अंगारे उस बस्ती में, जाने  कैसी आग लिए, वो सोच रहा था बस्ती में।                          किस पथ की वो बाट जोहता, कहाँ उसे जाना होगा,            राही को उस अन्धकार से, लड़कर मोती लाना होगा। औघड़ सा वो रुप बनाकर, खुद से बातें करता था, गम में था शायद… या फिर, उजियारे से डरता था ।             शब्द उसके मौन थे, और मौन थी सारी धरा,              आग आखों मे थी, लेकिन ढूंढने बाहर चला। अधखुले से शब्द थे, और आखों मे थी एक कशिश, लड़ने दुनिया मे वो निकला, लेकर माँ से वो आशीष।               राह थी कठिन मगर, वो लड़ रहा वीराने मे,               जल रहा तपिश मे, जैसे शमा हो मैखाने मे। राणा सा साहस था उसमें, चेतक जैसी फुर्ती थी, लड़ना ही अब कर्म था, उसमें ही अब मुक्ति थी।               रोज खुद से जंग करता, रोज खुद से हारता,                आन्धियो मे कुच करता, बल था उसमें हार का । आज भी वो लड़ रहा, अंगार लेकर बस्ती में, जाने कैसी आग लिए, वो सोच रहा था बस्ती में ।                             "

अभी-अभी तो धधक रहे थे, अंगारे उस बस्ती में,
जाने  कैसी आग लिए, वो सोच रहा था बस्ती में।             
            किस पथ की वो बाट जोहता, कहाँ उसे जाना होगा,
           राही को उस अन्धकार से, लड़कर मोती लाना होगा।
औघड़ सा वो रुप बनाकर, खुद से बातें करता था,
गम में था शायद… या फिर, उजियारे से डरता था ।
            शब्द उसके मौन थे, और मौन थी सारी धरा,
             आग आखों मे थी, लेकिन ढूंढने बाहर चला।
अधखुले से शब्द थे, और आखों मे थी एक कशिश,
लड़ने दुनिया मे वो निकला, लेकर माँ से वो आशीष।
              राह थी कठिन मगर, वो लड़ रहा वीराने मे,
              जल रहा तपिश मे, जैसे शमा हो मैखाने मे।
राणा सा साहस था उसमें, चेतक जैसी फुर्ती थी,
लड़ना ही अब कर्म था, उसमें ही अब मुक्ति थी।
              रोज खुद से जंग करता, रोज खुद से हारता,
               आन्धियो मे कुच करता, बल था उसमें हार का ।
आज भी वो लड़ रहा, अंगार लेकर बस्ती में,
जाने कैसी आग लिए, वो सोच रहा था बस्ती में ।
                            

 

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"नजर अक्सर शिकायत आज-कल करती है दर्पण से .... थकन भी चुटकीयाँ लेने लगी है तन से और मन से........ कहाँ तक हम सम्भाले उम्र का हर रोज गिरता घर..... तुम अपनी याद का मलबा उठाओ दिल के आंगन से..... #Dil_se"

नजर अक्सर शिकायत आज-कल करती है दर्पण से ....
थकन भी चुटकीयाँ लेने लगी है तन से और मन              से........
कहाँ तक हम सम्भाले उम्र का हर रोज गिरता घर.....
तुम अपनी याद का मलबा उठाओ दिल के आंगन से.....

#Dil_se

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"अभी तो बस इक आगाज़ है अपने पंखों को आसमां पर फैलाने की बस इक शुरुआत है"

अभी तो बस इक आगाज़ है 
अपने पंखों को 
आसमां पर फैलाने की बस इक शुरुआत है

#dedicatedtoallnozotofriends #for #all # my #Nojoto # family

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"Tu sahil bann main dariya bann tujhme sama jaaungi jo tu na mila toh main tabahi machaungi"

Tu sahil bann
main dariya bann 
tujhme sama jaaungi 
jo tu na mila 
toh main tabahi machaungi

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