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"रिश्तों में कभी भी तकरार में बोलचाल बंद ना कर सुलह के हर संभावित मौके को जीवित रखें. और हां अपने मिथ्या अभिमान को दफना दें, सारे झगडे की फसाद सिर्फ और सिर्फ झूठा अभिमान है।"

रिश्तों में कभी भी तकरार में बोलचाल बंद ना कर सुलह के हर संभावित मौके को जीवित रखें.
और हां अपने मिथ्या अभिमान को दफना दें, सारे झगडे की फसाद सिर्फ और सिर्फ झूठा अभिमान है।

रिश्तों में कभी भी तकरार में बोलचाल बंद ना कर सुलह के हर संभावित मौके को जीवित रखें.
और हां अपने मिथ्या अभिमान को दफना दें, सारे झगडे की फसाद सिर्फ और सिर्फ झूठा अभिमान है।

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"My heart can't accept, what my mind knows, My heart doesn't want to give up, after being so close. I know my expectaions will only hurt me, But my heart doesn't want to agree. My heart is, really so stubborn, As it only loves you, for me it has na concern With your habits I will get hurt, But then, my mind help me to divert. You can take me granted, as much as you want, But one day you will miss me, and memories will haunt. In my life, you are the best part, But i wish, my mind was more powerful, than my heart.."

My heart can't accept, what my mind knows,
My heart doesn't want to give up, after being so
close.
I know my expectaions will only hurt me,
But my heart doesn't want to agree.

My heart is, really so stubborn,
As it only loves you, for me it has na concern
With your habits I will get hurt,
But then, my mind help me to divert.

You can take me granted, as much as you want,
But one day you will miss me, and memories will
haunt.
In my life, you are the best part,
But i wish, my mind was more powerful, than my heart..

I can't forget you even not the memories.

#Love #BreakUp #lostlove #SAD #lonely #alone #missu #depressed #Hope #waiting #brokenheart #Feeling #hurted #cry #RIP #momories #Sanu #mathewsgirl #27 #comeback #nojotoenglish Brijesh Maurya pranali panchal Ankit Saxena Shanawaz Sabir Haimi Kumari #nojotobhuj

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"""मेरी पागल दोस्त"" आभासी दुनिया (सोशल मीडिया) पर महज हम किसी रिश्ते का आभास कर सकते है...अक्सर यही सोचता था ! मगर इस आभासी दुनिया मे मुझे कुछ ऐसे दोस्त मिले जिन्होंने आभासी दुनिया और वास्तविक दुनिया के बीच की अधूरी कड़ी "वास्तविकता"की पूर्ति की है !! एक दोस्त जिसे मेरे जुकाम से लेकर मेरे देर रात तक ऑफिस में काम करने को लेकर चिंता रहती है, उसकी हर पसंदीदा रचना को whatsapp के जरिये मुझ तक पहचाना ! खुद चलकर कॉल करती है और जी भर के बेमतलब का मुझे डांटने का उसका हुनर अद्वितीय है !! एक मिनट में कोई 20 लंबे लंबे वाक्य बोल पाए तो वो है मेरी वो दोस्त....! उसके और मेरे बीच की तकरीबन डेढ़ घण्टे की बात में मेरा योगदान महज इतना होता है कि मैं सिर्फ दस दस मिनट के अंतराल में "हा, हूं, ह्म्म्म" करता रहता है.....इतनी स्पष्ट चपड़ चपड़ महज मेरी वही दोस्त कर सकती है इस ब्रह्मांड में !! उसे अगर गलती से भी पूछ लू कि "आज के दिन तुमने क्या किया?" उसका जवाब सुबह उठकर आंख मचलने से लेकर " मेने मुह धोया, पानी एक ग्लास ही बर्बाद किया,नास्ता तैयार किया नास्ते में पोहे  बनाए और पोहे में इतनी हरी मिर्च डाली वगैरा वगैरा से लेकर दिन भर की छोटी से छोटी गतिविधियां वो कुछ ही समय मे बिना सांस लिए मेरे समक्ष रख देती है !! वो महज इतनी बोलती ही नही है.....उसका इस दुनिया के प्रति नजरिया भी बेहद खूबसूरत है ! उसकी सोच बहुत प्यारी है...वो हमेशा किसी भी चीज की पॉजिटिविटी में ज्यादा विश्वास करती है !! किसी भी विषय पर अच्छे से अच्छा तर्क पेश करना कोई उससे सीखे ! उसका मोह प्राकृतिक सुंदरता में अधिक है.......सफेद वादियों और झरने में तो जैसे उसकी जान बचती है ! समंदर तो जैसे उसका दोस्त है....खँडहर जगह में तो अपनी मासूमियत भरे चेहरे को लेकर खड़ी रह जाए तो ऐसा लगे जैसे खँडहर अब खँडहर न रहा !! खुद को पागल कहती है वो....है भी थोड़ी मैं भी मानता हूँ !! मगर उसका पागलपन बड़ा प्यारा है..... नई किताबो के प्रति उसकी बेताबियाँ,प्यारी रचनाओं को पढ़ने की उसकी उत्सुकता,घूमने जाने की उसकी बेसब्री....इतना पागलपन !! बायोलॉजी पढ़ते वक्त कोई इयरफोन लगाए और अपने मनपसंद SRK के गाने सुने फिर भी बायोलॉजी के चैप्टर को कंठष्ठ करे तो समझ नही आता कि ये उसका पागलपन है या कोई नई ट्रिक जिसको इन्वेंट इन्ही मोहतरमा ने किया है !! केमेस्ट्री की इक्वेशन को अगर कोई गाने की धुन सी पूरी रीदम में पढ़कर सुनाए तो हम अनुमान लगा सकते है कि वो उसमे किस तरह का पागलपन समाहित हो चुका है !! हा.....वैसे रेसिपी भी अच्छी बना लेती है ! सुना है उनकी बनाई दाल बड़ी चाव से खा लेते है उनके परिजन !!"

""मेरी पागल दोस्त""
आभासी दुनिया (सोशल मीडिया) पर महज हम किसी रिश्ते का आभास कर सकते है...अक्सर यही सोचता था !
मगर इस आभासी दुनिया मे मुझे कुछ ऐसे दोस्त मिले जिन्होंने आभासी दुनिया और वास्तविक दुनिया के बीच की अधूरी कड़ी "वास्तविकता"की पूर्ति की है !!
एक दोस्त जिसे मेरे जुकाम से लेकर मेरे देर रात तक ऑफिस में काम करने को लेकर चिंता रहती है, उसकी हर पसंदीदा रचना को whatsapp के जरिये मुझ तक पहचाना !
खुद चलकर कॉल करती है और जी भर के बेमतलब का मुझे डांटने का उसका हुनर अद्वितीय है !!
एक मिनट में कोई 20 लंबे लंबे वाक्य बोल पाए तो वो है मेरी वो दोस्त....!
उसके और मेरे बीच की तकरीबन डेढ़ घण्टे की बात में मेरा योगदान महज इतना होता है कि मैं सिर्फ दस दस मिनट के अंतराल में "हा, हूं, ह्म्म्म" करता रहता है.....इतनी स्पष्ट चपड़ चपड़ महज मेरी वही दोस्त कर सकती है इस ब्रह्मांड में !!
उसे अगर गलती से भी पूछ लू कि "आज के दिन तुमने क्या किया?" 
उसका जवाब सुबह उठकर आंख मचलने से लेकर " मेने मुह धोया, पानी एक ग्लास ही बर्बाद किया,नास्ता तैयार किया नास्ते में पोहे  बनाए और पोहे में इतनी हरी मिर्च डाली वगैरा वगैरा से लेकर दिन भर की छोटी से छोटी गतिविधियां वो कुछ ही समय मे बिना सांस लिए मेरे समक्ष रख देती है !! 
वो महज इतनी बोलती ही नही है.....उसका इस दुनिया के प्रति नजरिया भी बेहद खूबसूरत है !
उसकी सोच बहुत प्यारी है...वो हमेशा किसी भी चीज की पॉजिटिविटी में ज्यादा विश्वास करती है !!
किसी भी विषय पर अच्छे से अच्छा तर्क पेश करना कोई उससे सीखे !
उसका मोह प्राकृतिक सुंदरता में अधिक है.......सफेद वादियों और झरने में तो जैसे उसकी जान बचती है !
समंदर तो जैसे उसका दोस्त है....खँडहर जगह में तो अपनी मासूमियत भरे चेहरे को लेकर खड़ी रह जाए तो ऐसा लगे जैसे खँडहर अब खँडहर न रहा !!
खुद को पागल कहती है वो....है भी थोड़ी मैं भी मानता हूँ !!
मगर उसका पागलपन बड़ा प्यारा है.....
नई किताबो के प्रति उसकी बेताबियाँ,प्यारी रचनाओं को पढ़ने की उसकी उत्सुकता,घूमने जाने की उसकी बेसब्री....इतना पागलपन !!
बायोलॉजी पढ़ते वक्त कोई इयरफोन लगाए और अपने मनपसंद SRK के गाने सुने फिर भी बायोलॉजी के चैप्टर को कंठष्ठ करे तो समझ नही आता कि ये उसका पागलपन है या कोई नई ट्रिक जिसको इन्वेंट इन्ही मोहतरमा ने किया है !!
केमेस्ट्री की इक्वेशन को अगर कोई गाने की धुन सी पूरी रीदम में पढ़कर सुनाए तो हम अनुमान लगा सकते है कि वो उसमे किस तरह का पागलपन समाहित हो चुका है !!
हा.....वैसे रेसिपी भी अच्छी बना लेती है !
सुना है उनकी बनाई दाल बड़ी चाव से खा लेते है उनके परिजन !!

"मेरी पागल दोस्त"
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आभासी दुनिया (सोशल मीडिया) पर महज हम किसी रिश्ते का आभास कर सकते है...अक्सर यही सोचता था !
मगर इस आभासी दुनिया मे मुझे कुछ ऐसे दोस्त मिले जिन्होंने आभासी दुनिया और वास्तविक दुनिया के बीच की अधूरी कड़ी "वास्तविकता"की पूर्ति की है !!
एक दोस्त जिसे मेरे जुकाम से लेकर मेरे देर रात तक ऑफिस में काम करने को लेकर चिंता रहती है, उसकी हर पसंदीदा रचना को whatsapp के जरिये मुझ तक पहचाना !
खुद चलकर कॉल करती है और जी भर के बेमतलब का मुझे डांटने का उसका हुनर अद्वितीय है !!
एक मिनट में कोई 20 लंबे लंबे वाक्य बोल पाए तो वो है मेरी वो दोस्त....!
उसके और मेरे बीच की तकरीबन डेढ़ घण्टे की बात में मेरा योगदान महज इतना होता है कि मैं सिर्फ दस दस मिनट के अंतराल में "हा, हूं, ह्म्म्म" करता रहता है.....इतनी स्पष्ट चपड़ चपड़ महज मेरी वही दोस्त कर सकती है इस ब्रह्मांड में !!
उसे अगर गलती से भी पूछ लू कि "आज के दिन तुमने क्या किया?"
उसका जवाब सुबह उठकर आंख मचलने से लेकर " मेने मुह धोया, पानी एक ग्लास ही बर्बाद किया,नास्ता तैयार किया नास्ते में पोहे  बनाए और पोहे में इतनी हरी मिर्च डाली वगैरा वगैरा से लेकर दिन भर की छोटी से छोटी गतिविधियां वो कुछ ही समय मे बिना सांस लिए मेरे समक्ष रख देती है !!
वो महज इतनी बोलती ही नही है.....उसका इस दुनिया के प्रति नजरिया भी बेहद खूबसूरत है !
उसकी सोच बहुत प्यारी है...वो हमेशा किसी भी चीज की पॉजिटिविटी में ज्यादा विश्वास करती है !!
किसी भी विषय पर अच्छे से अच्छा तर्क पेश करना कोई उससे सीखे !
उसका मोह प्राकृतिक सुंदरता में अधिक है.......सफेद वादियों और झरने में तो जैसे उसकी जान बचती है !
समंदर तो जैसे उसका दोस्त है....खँडहर जगह में तो अपनी मासूमियत भरे चेहरे को लेकर खड़ी रह जाए तो ऐसा लगे जैसे खँडहर अब खँडहर न रहा !!
खुद को पागल कहती है वो....है भी थोड़ी मैं भी मानता हूँ !!
मगर उसका पागलपन बड़ा प्यारा है.....
नई किताबो के प्रति उसकी बेताबियाँ,प्यारी रचनाओं को पढ़ने की उसकी उत्सुकता,घूमने जाने की उसकी बेसब्री....इतना पागलपन !!
बायोलॉजी पढ़ते वक्त कोई इयरफोन लगाए और अपने मनपसंद SRK के गाने सुने फिर भी बायोलॉजी के चैप्टर को कंठष्ठ करे तो समझ नही आता कि ये उसका पागलपन है या कोई नई ट्रिक जिसको इन्वेंट इन्ही मोहतरमा ने किया है !!
केमेस्ट्री की इक्वेशन को अगर कोई गाने की धुन सी पूरी रीदम में पढ़कर सुनाए तो हम अनुमान लगा सकते है कि वो उसमे किस तरह का पागलपन समाहित हो चुका है !!
हा.....वैसे रेसिपी भी अच्छी बना लेती है !
सुना है उनकी बनाई दाल बड़ी चाव से खा लेते है उनके परिजन !!

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"गुरुजी ने वर्ग में पूछा - "औरत 👩 अपनी मांग में सिंदूर क्यों लगाती है ?" एक लड़की बोली - क्योंकि लड़कों को ध्यान रहे कि, जिस प्लॉट पर उनकी नजर है, उसका भूमीपूजन हो गया है 💁‍♀😆😝😜"

गुरुजी ने वर्ग में पूछा - "औरत 👩 अपनी मांग में सिंदूर क्यों लगाती है ?" एक लड़की बोली - क्योंकि लड़कों को ध्यान रहे कि, जिस प्लॉट पर उनकी नजर है, उसका भूमीपूजन हो गया है 
💁‍♀😆😝😜

गुरुजी ने वर्ग में पूछा - "औरत 👩 अपनी मांग में सिंदूर क्यों लगाती है ?" एक लड़की बोली - क्योंकि लड़कों को ध्यान रहे कि, जिस प्लॉट पर उनकी नजर है, उसका भूमीपूजन हो गया है 💁‍♀😆😝😜

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"“स्कूलो” में लिखा होता है, “असूल” तोडना मना है ! बागों में लिखा होता है, “फूल” तोडना मना है ! “खेलों” में लिखा होता है, “रूल” तोडना मना है ! ….काश … रिश्ते, परिवार, दोस्ती में भी यह लिखा होता कि “साथ” छोङना मना है”"

“स्कूलो” में लिखा होता है, “असूल” तोडना मना है !
बागों में लिखा होता है, “फूल” तोडना मना है !

“खेलों” में लिखा होता है, “रूल” तोडना मना है !

….काश …

रिश्ते, परिवार, दोस्ती में भी यह लिखा होता कि

“साथ” छोङना मना है”

“स्कूलो” में लिखा होता है, “असूल” तोडना मना है !
बागों में लिखा होता है, “फूल” तोडना मना है !

“खेलों” में लिखा होता है, “रूल” तोडना मना है !

….काश …

रिश्ते, परिवार, दोस्ती में भी यह लिखा होता कि

“साथ” छोङना मना है”

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