आजादी के आसमान में तारे थे अंबेडकर,  एक महाराष्ट् | हिंदी Poem

"आजादी के आसमान में तारे थे अंबेडकर,  एक महाराष्ट्रीयन मां के दुलारे थे अंबेडकर।  कितनों के लिए सहारे थे अंबेडकर,  कुछ भी हो चाहे हमारे थे अंबेडकर । कितने ही लोगों में नवाज़ थे अंबेडकर , सच के लिए ना रुकने वाली आवाज थे अंबेडकर।  हुई थी पैदाइश महाराष्ट्र में आज,  मिला जन्म और छोटा समाज । था वहां  छूत छात का रिवाज ,  अंबेडकर ने उठाई खिलाफ आवाज ।  ना बीतने वाला आज थे अंबेडकर,  सच के लिए ना रुकने वाली  आवाज थे अंबेडकर।  छुआछूत ,नापसंदी और जातिवाद का जाम , इन सब को मिटाना था उनका सबसे बड़ा मुकाम । हर तरह की छुआछूत का किया उन्होंने काम तमाम,  आगे चल संविधान लिखा और किया मुल्क में नाम।  भारत माता की लाज थे अंबेडकर , सच के लिए ना रुकने वाली आवाज थे अंबेडकर।  हर इंसान को उसका सही ओहदा दिलाएंगे,  हम अपने वतन से जातिवाद मिटायेंगे।  हर दिन को एक नई शुरुआत मनाएंगे,  हम अपने वतन के लिए मर मिट जाएंगे ।  ठंडे पानी की सुराही थे अंबेडकर , एक  खामोश सी गवाही थे अंबेडकर।  ऊंची उड़ाने भरने में जाबाज़ थे अंबेडकर , सच के लिए ना रुकने वाली आवाज थी अंबेडकर।                                       # ओजस्वी शर्मा ©Ojaswi Sharma"

आजादी के आसमान में तारे थे अंबेडकर,

 एक महाराष्ट्रीयन मां के दुलारे थे अंबेडकर।

 कितनों के लिए सहारे थे अंबेडकर,

 कुछ भी हो चाहे हमारे थे अंबेडकर ।

कितने ही लोगों में नवाज़ थे अंबेडकर ,

सच के लिए ना रुकने वाली आवाज थे अंबेडकर।


 हुई थी पैदाइश महाराष्ट्र में आज,

 मिला जन्म और छोटा समाज ।

था वहां  छूत छात का रिवाज ,

 अंबेडकर ने उठाई खिलाफ आवाज ।

 ना बीतने वाला आज थे अंबेडकर,

 सच के लिए ना रुकने वाली  आवाज थे अंबेडकर।


 छुआछूत ,नापसंदी और जातिवाद का जाम ,

इन सब को मिटाना था उनका सबसे बड़ा मुकाम ।

हर तरह की छुआछूत का किया उन्होंने काम तमाम,

 आगे चल संविधान लिखा और किया मुल्क में नाम।

 भारत माता की लाज थे अंबेडकर ,

सच के लिए ना रुकने वाली आवाज थे अंबेडकर।


 हर इंसान को उसका सही ओहदा दिलाएंगे,

 हम अपने वतन से जातिवाद मिटायेंगे।

 हर दिन को एक नई शुरुआत मनाएंगे,

 हम अपने वतन के लिए मर मिट जाएंगे ।


 ठंडे पानी की सुराही थे अंबेडकर ,

एक  खामोश सी गवाही थे अंबेडकर।

 ऊंची उड़ाने भरने में जाबाज़ थे अंबेडकर ,

सच के लिए ना रुकने वाली आवाज थी अंबेडकर।


                                      # ओजस्वी शर्मा

©Ojaswi Sharma

आजादी के आसमान में तारे थे अंबेडकर,  एक महाराष्ट्रीयन मां के दुलारे थे अंबेडकर।  कितनों के लिए सहारे थे अंबेडकर,  कुछ भी हो चाहे हमारे थे अंबेडकर । कितने ही लोगों में नवाज़ थे अंबेडकर , सच के लिए ना रुकने वाली आवाज थे अंबेडकर।  हुई थी पैदाइश महाराष्ट्र में आज,  मिला जन्म और छोटा समाज । था वहां  छूत छात का रिवाज ,  अंबेडकर ने उठाई खिलाफ आवाज ।  ना बीतने वाला आज थे अंबेडकर,  सच के लिए ना रुकने वाली  आवाज थे अंबेडकर।  छुआछूत ,नापसंदी और जातिवाद का जाम , इन सब को मिटाना था उनका सबसे बड़ा मुकाम । हर तरह की छुआछूत का किया उन्होंने काम तमाम,  आगे चल संविधान लिखा और किया मुल्क में नाम।  भारत माता की लाज थे अंबेडकर , सच के लिए ना रुकने वाली आवाज थे अंबेडकर।  हर इंसान को उसका सही ओहदा दिलाएंगे,  हम अपने वतन से जातिवाद मिटायेंगे।  हर दिन को एक नई शुरुआत मनाएंगे,  हम अपने वतन के लिए मर मिट जाएंगे ।  ठंडे पानी की सुराही थे अंबेडकर , एक  खामोश सी गवाही थे अंबेडकर।  ऊंची उड़ाने भरने में जाबाज़ थे अंबेडकर , सच के लिए ना रुकने वाली आवाज थी अंबेडकर।                                       # ओजस्वी शर्मा ©Ojaswi Sharma

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