अता कर मेरे खुदा जरा रहमत इस कुफ्र पर ; बड़ी दूर से | हिंदी शायरी और ग़ज़

"अता कर मेरे खुदा जरा रहमत इस कुफ्र पर ; बड़ी दूर से आया है वो तेरा पता पूछते हुए.. सोचता है करू सजदा की नही तेरे दर पर ; बड़ी देर तक वजू किया उसने ये सोचते हुए.. ©Jajbaat-e-Khwahish(जज्बात)"

 अता कर मेरे खुदा जरा रहमत इस कुफ्र पर ;
बड़ी दूर से आया है वो तेरा पता पूछते हुए.. 

सोचता है करू सजदा की नही तेरे दर पर ;
बड़ी देर तक वजू किया उसने ये सोचते हुए..

©Jajbaat-e-Khwahish(जज्बात)

अता कर मेरे खुदा जरा रहमत इस कुफ्र पर ; बड़ी दूर से आया है वो तेरा पता पूछते हुए.. सोचता है करू सजदा की नही तेरे दर पर ; बड़ी देर तक वजू किया उसने ये सोचते हुए.. ©Jajbaat-e-Khwahish(जज्बात)

अता कर मेरे खुदा जरा रहमत इस कुफ्र पर ;
बड़ी दूर से आया है वो तेरा पता पूछते हुए..

सोचता है करू सजदा की नही तेरे दर पर ;
बड़ी देर तक वजू किया उसने ये सोचते हुए..
#Collab
shahnawaz nazar official
#jajbaat_e_khwahish

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