न जाने क्या दर्द था मेरे इश्क में, कि स्याही भी रो | हिंदी शायरी

"न जाने क्या दर्द था मेरे इश्क में, कि स्याही भी रोने लगी मेरी दास्तान लिखते लिखते।"

न जाने क्या दर्द था मेरे इश्क में,
कि स्याही भी रोने लगी 
मेरी दास्तान लिखते लिखते।

न जाने क्या दर्द था मेरे इश्क में, कि स्याही भी रोने लगी मेरी दास्तान लिखते लिखते।

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