मिट्टी मेरी हकीकत, मिट्टी मेरा फसाना, मिट्टी से ही

"मिट्टी मेरी हकीकत, मिट्टी मेरा फसाना, मिट्टी से ही निर्मित मेरा ताना बाना। धूल उड़ाई उसी ने जिस के लिए बनी मिट्टी आसान नहीं होता किसी के लिए मिट्टी हो जाना। किसी से दिल से जुड़ पाना, फिर भावनाओं में बह जाना। बहुत मुश्किल होता है दरिया जैसे सागर में मिलकर उसी में खो जाना। पत्तो का पेड़ो से पतझड़ में अलग हो जाना। दुःख देता है बहुत झरने का ऊंचाई से गिरने पर चट्टान से टकराना, फिर भी चट्टान का उसको नहीं अपनाना।"

मिट्टी मेरी हकीकत, मिट्टी मेरा फसाना,
मिट्टी से ही निर्मित मेरा ताना बाना।
धूल उड़ाई उसी ने जिस के लिए बनी मिट्टी
आसान नहीं होता किसी के लिए मिट्टी हो जाना।
किसी से दिल से जुड़ पाना,
फिर भावनाओं में बह जाना।
बहुत मुश्किल होता है
दरिया जैसे सागर में मिलकर उसी में खो जाना।
पत्तो का पेड़ो से पतझड़ में अलग हो जाना।
दुःख देता है बहुत
झरने का ऊंचाई से गिरने पर चट्टान से टकराना,
फिर भी चट्टान का उसको नहीं अपनाना।

मिट्टी मेरी हकीकत, मिट्टी मेरा फसाना, मिट्टी से ही निर्मित मेरा ताना बाना। धूल उड़ाई उसी ने जिस के लिए बनी मिट्टी आसान नहीं होता किसी के लिए मिट्टी हो जाना। किसी से दिल से जुड़ पाना, फिर भावनाओं में बह जाना। बहुत मुश्किल होता है दरिया जैसे सागर में मिलकर उसी में खो जाना। पत्तो का पेड़ो से पतझड़ में अलग हो जाना। दुःख देता है बहुत झरने का ऊंचाई से गिरने पर चट्टान से टकराना, फिर भी चट्टान का उसको नहीं अपनाना।

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