एक दुविधा सी है इस मन में, के भीतर हलचल -सा कुछ म | हिंदी कविता

"एक दुविधा सी है इस मन में, के भीतर हलचल -सा कुछ माहौल है .. ज़िंदगी कौन सी करवट पर है मालूम नहीं, कुछ पाने की कोशिश , कुछ खोने पर मजबूर करेगी.. दो रहें भला एक कैसे होगी!! आज को पाने की कोशिश में , छूट न जाये कहीं कल के लिए जो ख़्वाब बुने थे.. बेशक आज बेहतर करने की कोशिश में हूँ लगी.. ये राह थोड़ी अलग है.. संघर्ष से भरा बहुत कठिन डगर है.. डर इस बात से नहीं के कैसा कर पाउंगी.. हौसले इतने बुलंद है के मुश्किलों को पार कर हर मुकाम को पाउंगी.. बेचैनी तो बस इस बात की है के कुछ अनकहा सा छूट न जाये.. जो मेरा फिलहाल नहीं , वो मुझसे दूर न हो जाये.. वक़्त करवट ले कुछ ऐसा के हर मुश्किल का हल निकल आये.. दो राहें मेरी एक डगर हो जाये.. कुछ न छुटे जिसकी तलब है इस दिल को.. काश!मेरी अच्छाइयों का इतना तो फल मिल पाए.."

एक दुविधा सी है इस मन में,
के  भीतर हलचल -सा कुछ माहौल है ..

ज़िंदगी कौन सी करवट पर है मालूम नहीं,
कुछ पाने की कोशिश , कुछ खोने पर मजबूर करेगी..
दो रहें भला एक कैसे होगी!!
आज को पाने की कोशिश में ,
छूट न जाये कहीं
कल के लिए जो ख़्वाब बुने थे..

बेशक आज बेहतर करने की कोशिश में हूँ लगी..
ये राह थोड़ी अलग है.. संघर्ष से भरा बहुत कठिन डगर है..
डर इस बात से नहीं के कैसा कर पाउंगी.. हौसले इतने बुलंद है के 
मुश्किलों को पार कर हर मुकाम को पाउंगी..

बेचैनी तो बस इस बात की है के कुछ अनकहा सा छूट न जाये..
जो मेरा फिलहाल नहीं , वो मुझसे दूर न हो जाये..
वक़्त करवट ले कुछ ऐसा के
हर मुश्किल का हल निकल आये..
दो राहें मेरी एक डगर हो जाये..
कुछ न छुटे जिसकी तलब है इस दिल को..
काश!मेरी अच्छाइयों का इतना तो 
फल मिल पाए..

एक दुविधा सी है इस मन में, के भीतर हलचल -सा कुछ माहौल है .. ज़िंदगी कौन सी करवट पर है मालूम नहीं, कुछ पाने की कोशिश , कुछ खोने पर मजबूर करेगी.. दो रहें भला एक कैसे होगी!! आज को पाने की कोशिश में , छूट न जाये कहीं कल के लिए जो ख़्वाब बुने थे.. बेशक आज बेहतर करने की कोशिश में हूँ लगी.. ये राह थोड़ी अलग है.. संघर्ष से भरा बहुत कठिन डगर है.. डर इस बात से नहीं के कैसा कर पाउंगी.. हौसले इतने बुलंद है के मुश्किलों को पार कर हर मुकाम को पाउंगी.. बेचैनी तो बस इस बात की है के कुछ अनकहा सा छूट न जाये.. जो मेरा फिलहाल नहीं , वो मुझसे दूर न हो जाये.. वक़्त करवट ले कुछ ऐसा के हर मुश्किल का हल निकल आये.. दो राहें मेरी एक डगर हो जाये.. कुछ न छुटे जिसकी तलब है इस दिल को.. काश!मेरी अच्छाइयों का इतना तो फल मिल पाए..

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