ना अल्ला कहने से राम बुरा मानता है ना राम कहने से | हिंदी Shayari

"ना अल्ला कहने से राम बुरा मानता है ना राम कहने से अल्ला बुरा मानता है ये तो इंसा की नासमझी है ज़नाब जो उसे अपने घर की ज़ागीर मानता है"

ना अल्ला कहने से राम बुरा मानता है
ना राम कहने से अल्ला बुरा मानता है

ये तो इंसा की नासमझी है ज़नाब
जो उसे अपने घर की ज़ागीर मानता है

ना अल्ला कहने से राम बुरा मानता है ना राम कहने से अल्ला बुरा मानता है ये तो इंसा की नासमझी है ज़नाब जो उसे अपने घर की ज़ागीर मानता है

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