पढ़ता नहीं है कोई भी जिसको , मैं अख़बार की वो ख़बर ह | Hindi | Nojoto...

पढ़ता नहीं है कोई भी जिसको , 
मैं अख़बार की वो ख़बर हो गया हूँ ।
मौत तक जिसको खाने से आती नहीं है,
मैं नकली सा कोई ज़हर हो गया हूँ ।
किसी दर पे ठोकर भी मिलती नहीं,
मैं इस कदर बेकदर हो गया हूँ ।
खाली पड़े हैं, जिसके मोहल्ले 
मैं उजड़ा हुआ वो शहर हो गया हूँ ।
ज़माने को मुझसे क्या तक़लीफ है?
मैं कौन सा अब कहर हो गया हूँ ?
नहीं फर्क पड़ता किसी बात का 
हर एक बात से बेफिकर हो गया हूँ ।

पढ़ता नहीं है कोई भी जिसको , मैं अख़बार की वो ख़बर हो गया हूँ । मौत तक जिसको खाने से आती नहीं है, मैं नकली सा कोई ज़हर हो गया हूँ । किसी दर पे ठोकर भी मिलती नहीं, मैं इस कदर बेकदर हो गया हूँ । खाली पड़े हैं, जिसके मोहल्ले मैं उजड़ा हुआ वो शहर हो गया हूँ । ज़माने को मुझसे क्या तक़लीफ है? मैं कौन सा अब कहर हो गया हूँ ? नहीं फर्क पड़ता किसी बात का हर एक बात से बेफिकर हो गया हूँ ।

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