God कैसे दूर रहू में उसे खुदा जो मेरी पहली चाहत ह | हिंदी Poem

"God कैसे दूर रहू में उसे खुदा जो मेरी पहली चाहत है। चाहे मत लिख तू उसे मेरी तकदीर में मगर उसे पाने की एक उमीद तो ज़िंदा रहने दे।"

God कैसे दूर रहू में उसे खुदा 
जो मेरी पहली चाहत है।
चाहे मत लिख तू उसे मेरी 
तकदीर में 
मगर उसे पाने की एक उमीद तो ज़िंदा रहने दे।

God कैसे दूर रहू में उसे खुदा जो मेरी पहली चाहत है। चाहे मत लिख तू उसे मेरी तकदीर में मगर उसे पाने की एक उमीद तो ज़िंदा रहने दे।

पाने की उमीद#shayari #Poetry

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