ख़्वाहिशों की चाह में परिंदा पिंजरा छोड़ गया कर क़त्ल | हिंदी Shayari

"ख़्वाहिशों की चाह में परिंदा पिंजरा छोड़ गया कर क़त्ल मुहब्बत का सारा आसमां छू गया हो गया मरहूम कोई अपने आप से यंहा उसको क्या जो किसी ओर का हो गया"

ख़्वाहिशों की चाह में परिंदा पिंजरा छोड़ गया
कर क़त्ल मुहब्बत का सारा आसमां छू गया

हो गया मरहूम कोई अपने आप से यंहा
उसको क्या जो किसी ओर का हो गया

ख़्वाहिशों की चाह में परिंदा पिंजरा छोड़ गया कर क़त्ल मुहब्बत का सारा आसमां छू गया हो गया मरहूम कोई अपने आप से यंहा उसको क्या जो किसी ओर का हो गया

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