अाज सोचा कि चलो समाज बदला जाये पर फिर सोचा शाम तू

"अाज सोचा कि चलो समाज बदला जाये पर फिर सोचा शाम तू तो अकेला है क्या करेगा अन्दर से आबाज आयी अकेला है तो क्या हुआ दम तो हजारों का रखता है"

अाज सोचा कि चलो समाज बदला जाये पर फिर सोचा शाम तू तो अकेला है क्या करेगा 
अन्दर से आबाज आयी अकेला है तो क्या हुआ दम तो हजारों का रखता है

अाज सोचा कि चलो समाज बदला जाये पर फिर सोचा शाम तू तो अकेला है क्या करेगा अन्दर से आबाज आयी अकेला है तो क्या हुआ दम तो हजारों का रखता है

abbaj

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