आज़ादी की चाह रखने वाले आज अनजान है जो बंद है पिंज

"आज़ादी की चाह रखने वाले आज अनजान है जो बंद है पिंजरे में उनकी पहचान है"

आज़ादी की चाह रखने वाले आज अनजान है
जो बंद है पिंजरे में उनकी पहचान है

आज़ादी की चाह रखने वाले आज अनजान है जो बंद है पिंजरे में उनकी पहचान है

# अपनों की बंदगी प्यारी है इसलिए ये आज़ादी हारी है

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