जब तक मन दौड़ते रहता है, चिन्ताओं में खोया रहता है,

"जब तक मन दौड़ते रहता है, चिन्ताओं में खोया रहता है, तब तक शरीर भी थकते रहता है। इसीलिये शायद एक मजदूर रात में चैन की नींद सो पता है,पर एक धनी व्यवसायी नहीं , क्योंकि मजदूर को बस पेट की चिन्ता होती है,जो दो रोटी मिलने पर पूरी हो चुकी होती है। पर एक व्यवसायी की अत्यधिक धन कमाने की चाह कभी नहीं मिटती।।"

जब तक मन दौड़ते रहता है,
चिन्ताओं में खोया रहता है,
तब तक शरीर भी थकते रहता है।

इसीलिये शायद एक मजदूर रात में चैन की नींद सो पता है,पर एक धनी व्यवसायी नहीं ,

क्योंकि मजदूर को बस पेट की चिन्ता होती है,जो दो रोटी मिलने पर पूरी हो चुकी होती है।

पर एक व्यवसायी की अत्यधिक धन कमाने की चाह कभी नहीं मिटती।।

जब तक मन दौड़ते रहता है, चिन्ताओं में खोया रहता है, तब तक शरीर भी थकते रहता है। इसीलिये शायद एक मजदूर रात में चैन की नींद सो पता है,पर एक धनी व्यवसायी नहीं , क्योंकि मजदूर को बस पेट की चिन्ता होती है,जो दो रोटी मिलने पर पूरी हो चुकी होती है। पर एक व्यवसायी की अत्यधिक धन कमाने की चाह कभी नहीं मिटती।।

मजदूर
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