मेरे दर्द पे अपने ये आँसू ज़ाया न करो, रख होंठ ज़ख्मों पे मरहम बन जा...

मेरे दर्द पे अपने ये आँसू ज़ाया न करो,
रख होंठ ज़ख्मों पे मरहम बन जाया करो।

-अफ़साना

मेरे दर्द पे अपने ये आँसू ज़ाया न करो, रख होंठ ज़ख्मों पे मरहम बन जाया करो। -अफ़साना

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