जब भी ना आए नींद कभी तेरी यादों से रातें जोड़ आता | हिंदी शायरी

"जब भी ना आए नींद कभी तेरी यादों से रातें जोड़ आता हूँ मैं.... इक हवस भी जगती है मुझमें पर जिस्म कहीं और छोड़ आता हूँ मैं।"

जब भी ना आए नींद कभी 
तेरी यादों से रातें जोड़ आता हूँ मैं....
इक हवस भी जगती है मुझमें 
पर जिस्म कहीं और छोड़ आता हूँ मैं।

जब भी ना आए नींद कभी तेरी यादों से रातें जोड़ आता हूँ मैं.... इक हवस भी जगती है मुझमें पर जिस्म कहीं और छोड़ आता हूँ मैं।

इक हवस

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