सुना है कि तुम शुकून बांटते हो, मुझपे भी थोड़ा सा | हिंदी शायरी

"सुना है कि तुम शुकून बांटते हो, मुझपे भी थोड़ा सा रहम कर दो। मैं बेचैनियों में जी रहा हूँ वर्षों से, मेरे दिल पे जरा मरहम कर दो।।"

सुना है कि तुम शुकून बांटते हो,
मुझपे भी थोड़ा सा रहम कर दो।
मैं बेचैनियों में जी रहा हूँ वर्षों से,
मेरे दिल पे जरा मरहम कर दो।।

सुना है कि तुम शुकून बांटते हो, मुझपे भी थोड़ा सा रहम कर दो। मैं बेचैनियों में जी रहा हूँ वर्षों से, मेरे दिल पे जरा मरहम कर दो।।

जरी मरहम कर दो।
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