हमने भेजें थे जो इश्क के ख़त मिले नहीं तुमको, लगता | हिंदी Poem

"हमने भेजें थे जो इश्क के ख़त मिले नहीं तुमको, लगता है खो गए है, अंधेरे को दूर कर दे, वो सुबह ही ना हो सकी, जो फूल दिए, वो अब खिल ना सके, तेरी मेरी रात ही बहुत काली थी, तुझे तो चांद से भी ज्यादा सरहद मिला, हमने तो इश्क ही भेजा था, तुझे तो ना जाने वो भी बेवफा लगा, इसलिए हमें बदले में दर्द मिला, हमने भेजें थे जो इश्क के ख़त मिले नहीं तुमको लगता है खो गए है।।। Shruti garg"

हमने भेजें थे जो इश्क के ख़त
मिले नहीं तुमको,
लगता है खो गए है,
अंधेरे को दूर कर दे,
वो सुबह ही ना हो सकी,
जो फूल दिए,
 वो अब खिल ना सके,
तेरी मेरी रात ही बहुत काली थी,
तुझे तो चांद से भी ज्यादा सरहद मिला,
हमने तो इश्क ही भेजा था,
तुझे तो ना जाने वो भी बेवफा लगा,
इसलिए हमें बदले में दर्द मिला,
हमने भेजें थे जो इश्क के ख़त
मिले नहीं तुमको लगता है खो गए है।।।


Shruti garg

हमने भेजें थे जो इश्क के ख़त मिले नहीं तुमको, लगता है खो गए है, अंधेरे को दूर कर दे, वो सुबह ही ना हो सकी, जो फूल दिए, वो अब खिल ना सके, तेरी मेरी रात ही बहुत काली थी, तुझे तो चांद से भी ज्यादा सरहद मिला, हमने तो इश्क ही भेजा था, तुझे तो ना जाने वो भी बेवफा लगा, इसलिए हमें बदले में दर्द मिला, हमने भेजें थे जो इश्क के ख़त मिले नहीं तुमको लगता है खो गए है।।। Shruti garg

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