Riyaarth An Imagination my new Painting कभी कभी मै सोचती हूँ आशा क...

Riyaarth An Imagination
my new Painting
कभी कभी मै सोचती हूँ
आशा के दीप जलाए
तुम्हे ढूंढ़ रही हूँ 
हे -गौतम बुद्ध 
तुम ...एक भाव
जरुर हो ....
पर पूर्ण कविता नहीं
अपनी ही कैद से भागे
खुले आसमान के नीचे
क्या मिला वहाँ
विचार,एहसास ..अनुभव...
ज्ञान भी ...बाँट लेने को
मानती हूँ मिला होगा
बहुत कुछ .....
पर ज्ञान वो नहीं जो
जो तुमने
किताबो में लिख दिया
और हमने पढ़ लिया ||

जन्म लिया था..
तो
कम से कम उसे
भोगते तो
देखते ...
कितने उतार चड़ाव
है इस जीवन में
जीवन वो नहीं
जो तुमने जिया 
एक पेड़ के नीचे .....
जीवन वो है
जो एक औरत जीती है
अपने परिवार के लिए
माँ,बहन,बेटी और पत्नी
बन के ...
जीवन वो है जो
एक भाई जीता है
अपनी बहनों के लिए
उनके सामने एक आदर्श
रखने के लिए
कर देता है खुद की
इच्छायों का बलिदान
एक परिवार को
उनकी ख़ुशी देने
के लिए
जीवन वो है
जहां चार बाते हो
कुछ झगडा
कुछ प्यार हो
पति पत्नी में
मान- मुनहार हो
तकरार हो
जहाँ ..
इधर उधर की
कह लेने से
मन का गुबार
निकल जाता है
जैसे तैसे
हँसते-खेलते
लड़ते-झगड़ते
ये समय भी
खूब गुज़र जाता है 
हे -गौतम बुद्ध 
अफ़सोस है मुझे
की एक मिले जीवन को
तुमने यूँ ही
व्यर्थ गँवा दिया
देखे नहीं जीवन के सभी रंग
और ज्ञान के शब्दों में
संसार को बहा दिया
Anu

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