वो दिन का रात से शाम को मिलना, जैसे फजां में हज

वो दिन का रात से  शाम को मिलना,   जैसे फजां में हजारों 

फूलों का खिलना

जैसे अम्बर में झिलमिल 

तारों का निकलना 

जैसे चांद की चांदनी का 

शोख हो निखरना 

वो दिन का रात से

शाम को मिलना

वो दिन का रात से शाम को मिलना, जैसे फजां में हजारों फूलों का खिलना जैसे अम्बर में झिलमिल तारों का निकलना जैसे चांद की चांदनी का शोख हो निखरना वो दिन का रात से शाम को मिलना

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