तेरे कंगन आज फिर मेहंदी का त्योहार हुआ है,रंग मेर | हिंदी शायरी

"तेरे कंगन आज फिर मेहंदी का त्योहार हुआ है,रंग मेरे इश्क़ का उसके हाथों में गुलज़ार हुआ है. लिखा है मेरा इश्क़ उसने मेहंदी में,आज लगता है मोहब्बत मेरी का असर बेशुमार हुआ है।"

तेरे कंगन आज फिर मेहंदी का त्योहार हुआ है,रंग 
मेरे इश्क़ का उसके
 हाथों में गुलज़ार हुआ है.


लिखा है मेरा इश्क़ उसने मेहंदी में,आज
 लगता है मोहब्बत मेरी 
का असर बेशुमार हुआ है।

तेरे कंगन आज फिर मेहंदी का त्योहार हुआ है,रंग मेरे इश्क़ का उसके हाथों में गुलज़ार हुआ है. लिखा है मेरा इश्क़ उसने मेहंदी में,आज लगता है मोहब्बत मेरी का असर बेशुमार हुआ है।

aaj fir mehndi ka tyohar huya hai,rang mere ishq ka uske hathon mai gulzar huya hai.

likha hai mera ishq usnai mehndi mai aaj,lagta hai mohabbat meri ka asar beshumar hua hai.

आज फिर मेहंदी का त्योहार हुआ है,रंग मेरे इश्क़ का उसके हाथों में गुलज़ार हुआ है.

लिखा है मेरा इश्क़ उसने मेहंदी में आज लगता है मोहब्बत मेरी का असर बेशुमार हुआ है।

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