मोंहब्बत झुठी हो या सच्ची हो पुरी सिद्त सें चाहों | हिंदी शायरी

"मोंहब्बत झुठी हो या सच्ची हो पुरी सिद्त सें चाहों किसी को पुरी कायनात भुला दो लेकिन ऐंहतराम मैं मुझे याद रखना sanju panwar"

मोंहब्बत झुठी हो या सच्ची हो 
पुरी सिद्त सें चाहों किसी को
पुरी कायनात भुला दो
 लेकिन ऐंहतराम मैं मुझे याद रखना
sanju panwar

मोंहब्बत झुठी हो या सच्ची हो पुरी सिद्त सें चाहों किसी को पुरी कायनात भुला दो लेकिन ऐंहतराम मैं मुझे याद रखना sanju panwar

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