जरूरी नही कुछ तोडने के लिये पथ्थर ही मारा जाए । लह | हिंदी शायरी

"जरूरी नही कुछ तोडने के लिये पथ्थर ही मारा जाए । लहजा बदल के बोलने से भी बहोत कुछ टूट जाता है ।।"

जरूरी नही कुछ तोडने के लिये पथ्थर ही मारा जाए ।
लहजा बदल के बोलने से भी बहोत कुछ टूट जाता है ।।

जरूरी नही कुछ तोडने के लिये पथ्थर ही मारा जाए । लहजा बदल के बोलने से भी बहोत कुछ टूट जाता है ।।

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