चाय और चौपाल वो चाय की चुस्कियां, चौपाल सजा रही ह

"चाय और चौपाल वो चाय की चुस्कियां, चौपाल सजा रही है आ जाओ फिर ,यारों की टोली बुला रही है वो कप, वो प्लेटो की हिस्सेदारी पुकारे वो इलायची चाय को और महका रही है भूली बिसरी बातों को सुनाने का बहाना अदरक की महक बस यही समझा रही है घुलमिल के कैसे एक नया रिश्ता बना दे दूध पानी पत्ती संग चीनी घुली जा रही है आमिल"

चाय और चौपाल  वो चाय की चुस्कियां, चौपाल सजा रही है
आ जाओ फिर ,यारों की टोली बुला रही है 

वो कप, वो प्लेटो की हिस्सेदारी पुकारे
वो इलायची चाय को और महका रही है

भूली बिसरी बातों को सुनाने का बहाना
अदरक की महक बस यही समझा रही है

घुलमिल के कैसे एक नया रिश्ता बना दे
दूध पानी पत्ती संग चीनी घुली जा रही है 

आमिल

चाय और चौपाल वो चाय की चुस्कियां, चौपाल सजा रही है आ जाओ फिर ,यारों की टोली बुला रही है वो कप, वो प्लेटो की हिस्सेदारी पुकारे वो इलायची चाय को और महका रही है भूली बिसरी बातों को सुनाने का बहाना अदरक की महक बस यही समझा रही है घुलमिल के कैसे एक नया रिश्ता बना दे दूध पानी पत्ती संग चीनी घुली जा रही है आमिल

Wo chaaye ki chuskiya,choopaal sajaa rhi hai
Aa jaao fir,yaaro ki tooli bula rhi hai

Wo cup,wo plato ki hissedaari pukaare
Wo elaichi chaaye ko oor mehka rahi hai

Bhooli bisri baato ko sunaane ka bahaana
Adrak ki mehak yahi samjha rhi hai

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