यूँ फेंककर कागज की तोहिन ना कर ए गालिब..... आजकल स | हिंदी Shayari

"यूँ फेंककर कागज की तोहिन ना कर ए गालिब..... आजकल सरकारी कागज के बिना आदमी का अस्तित्व नही है।"

यूँ फेंककर कागज की तोहिन ना कर ए गालिब.....
आजकल सरकारी कागज के बिना आदमी का अस्तित्व नही है।

यूँ फेंककर कागज की तोहिन ना कर ए गालिब..... आजकल सरकारी कागज के बिना आदमी का अस्तित्व नही है।

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यूँ फेंककर कागज की तोहिन ना कर ए गालिब.....

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