मै तुझसे मिलते मिलते रह गया डर है कहि हमारा प्यार पुराना न हो जाय, तू रेत सी फिसलती गयी मुट्ठी से मेरे डर है कि मेरा दिल कहि उजड़े घरौंदो का घराना न हो जाय हितेश यादव एक डर है--------////