एक बूढ़ा सा आदमी, लिए मन मे शक्ति अपार, दिलाने देश | English Poem

"एक बूढ़ा सा आदमी, लिए मन मे शक्ति अपार, दिलाने देश को आज़ादी, चला वो अंहिसा की राह। चुनौतियां उसे रोक न पाई, हौसलें तोड़ न पाई कठिन राह। बिना रुके, बिना झुके, चलता रहा, चुनी थी जो राह। डटा रहा, ज़िद पे अड़ा रहा, छोड़ी न एक पल भी राह। लड़ता रहा, आखिरी साँस तक, दिखाई भारतवर्ष को नई राह। #ThankiThoughts"

एक बूढ़ा सा आदमी,
लिए मन मे शक्ति अपार,

दिलाने देश को आज़ादी,
चला वो अंहिसा की राह।

चुनौतियां उसे रोक न  पाई,
हौसलें तोड़ न पाई कठिन राह।

बिना रुके, बिना झुके,
चलता रहा, चुनी थी जो राह।

डटा रहा, ज़िद पे अड़ा रहा,
छोड़ी न एक पल भी राह।

लड़ता रहा, आखिरी साँस तक,
दिखाई भारतवर्ष को नई राह।


#ThankiThoughts

एक बूढ़ा सा आदमी, लिए मन मे शक्ति अपार, दिलाने देश को आज़ादी, चला वो अंहिसा की राह। चुनौतियां उसे रोक न पाई, हौसलें तोड़ न पाई कठिन राह। बिना रुके, बिना झुके, चलता रहा, चुनी थी जो राह। डटा रहा, ज़िद पे अड़ा रहा, छोड़ी न एक पल भी राह। लड़ता रहा, आखिरी साँस तक, दिखाई भारतवर्ष को नई राह। #ThankiThoughts

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