गुरु गोविंद की कुर्बानी में, गंगा की कहानी में, जम | English Shayari

"गुरु गोविंद की कुर्बानी में, गंगा की कहानी में, जमजम के पानी में, लहराता है इम्तिहान का तिरंगा, शेखर की मुस्कुराहट में, भगत की बगावत में, आजाद की चाहत में, लहराता है अरमान का तिरंगा, वर्दी में, खाकी में, पिता की बैसाखी में, बहनों की राखी में, लहराता है अभ्युत्थान का तिरंगा, भाई के गुरूर में, मां के आंखो के नूर में, मांग के सिंदूर में, लहराता है हिंदुस्तान का तिरंगा।। @Satyam Purohit"

गुरु गोविंद की कुर्बानी में, गंगा की कहानी में, जमजम के पानी में, लहराता है इम्तिहान का तिरंगा,
 शेखर की मुस्कुराहट में, भगत की बगावत में, आजाद की चाहत में, लहराता है अरमान का तिरंगा,
वर्दी में, खाकी में, पिता की बैसाखी में, बहनों की राखी में, 
लहराता है अभ्युत्थान का तिरंगा, 
भाई के गुरूर में, मां के आंखो के नूर में, मांग के सिंदूर में, 
लहराता है हिंदुस्तान का तिरंगा।।

@Satyam Purohit

गुरु गोविंद की कुर्बानी में, गंगा की कहानी में, जमजम के पानी में, लहराता है इम्तिहान का तिरंगा, शेखर की मुस्कुराहट में, भगत की बगावत में, आजाद की चाहत में, लहराता है अरमान का तिरंगा, वर्दी में, खाकी में, पिता की बैसाखी में, बहनों की राखी में, लहराता है अभ्युत्थान का तिरंगा, भाई के गुरूर में, मां के आंखो के नूर में, मांग के सिंदूर में, लहराता है हिंदुस्तान का तिरंगा।। @Satyam Purohit

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