कयामत के रोज हिसाब होगा तुमसे न कोई सवाल होंगा न

"कयामत के रोज हिसाब होगा तुमसे न कोई सवाल होंगा न कोई जवाब होगा होगी बस एक आखिरी मुलाकात बेबसी तुम्हारे चेहरे पर भी होगी बेबसी ओर चिंताओं की शिकन की लकीरे मेरे चेहरे पर भी होगी हिसाब तुम्हारा भी होगा, हिसाब मेरा भी होगा हिसाब हर एक चीज का होगा !उन खुशियों का भी जो मैने तुम्हारे हिस्से डाली थी ओर उन दुखो का भी जो तुमने बिना किसी गुस्ताखी मेरे हिस्से लिख दिए थे..... कयामत के रोज हिसाब होगा न कोई सवाल होंगा न कोई जवाब होगा होगी बस एक आखिरी मुलाकात न तुम कुछ कहना ,न मै कहूंगी न तुम कुछ सुनना , न मै सुनूँगी, मै मुझे मेरा गुनाह बता देना ,ओर जो न बता पाओ मेरा गुनाह तो मुझ पे लगाए गये तुम्हारे तमाम इल्मों और जुल्मो के मेरे जिस्म पे निशान जरुर देख लेना बेफिक्र रहो तुमसे बदला नही लुंगी न ही करूँगी कोई फरियाद क्योंकी कयामत के रोज हिसाब होगा तुमसे न कोई सवाल होंगा न कोई जवाब होगा होगी बस एक आखिरी मुलाकात ..."

कयामत के रोज हिसाब होगा तुमसे न कोई सवाल होंगा 
न कोई जवाब होगा होगी बस एक आखिरी मुलाकात 
बेबसी तुम्हारे चेहरे पर भी होगी बेबसी ओर चिंताओं की 
शिकन की लकीरे मेरे चेहरे पर भी होगी हिसाब तुम्हारा भी होगा,
 हिसाब मेरा भी होगा हिसाब हर एक चीज का होगा 
!उन खुशियों का भी जो मैने तुम्हारे हिस्से डाली थी 
ओर उन दुखो का भी जो तुमने बिना किसी गुस्ताखी मेरे
 हिस्से लिख दिए थे.....

कयामत के रोज हिसाब होगा न कोई सवाल होंगा 
   न कोई जवाब होगा होगी बस एक आखिरी मुलाकात
न तुम कुछ कहना ,न मै कहूंगी न तुम कुछ सुनना ,
न मै सुनूँगी, मै मुझे मेरा गुनाह बता देना ,ओर जो न 
बता पाओ मेरा गुनाह तो मुझ पे लगाए गये तुम्हारे
 तमाम इल्मों और जुल्मो के मेरे जिस्म पे निशान जरुर 
देख लेना बेफिक्र रहो तुमसे बदला नही लुंगी न   
ही करूँगी कोई फरियाद क्योंकी
कयामत के रोज हिसाब होगा तुमसे न कोई सवाल होंगा 
न कोई जवाब होगा होगी बस एक आखिरी मुलाकात ...

कयामत के रोज हिसाब होगा तुमसे न कोई सवाल होंगा न कोई जवाब होगा होगी बस एक आखिरी मुलाकात बेबसी तुम्हारे चेहरे पर भी होगी बेबसी ओर चिंताओं की शिकन की लकीरे मेरे चेहरे पर भी होगी हिसाब तुम्हारा भी होगा, हिसाब मेरा भी होगा हिसाब हर एक चीज का होगा !उन खुशियों का भी जो मैने तुम्हारे हिस्से डाली थी ओर उन दुखो का भी जो तुमने बिना किसी गुस्ताखी मेरे हिस्से लिख दिए थे..... कयामत के रोज हिसाब होगा न कोई सवाल होंगा न कोई जवाब होगा होगी बस एक आखिरी मुलाकात न तुम कुछ कहना ,न मै कहूंगी न तुम कुछ सुनना , न मै सुनूँगी, मै मुझे मेरा गुनाह बता देना ,ओर जो न बता पाओ मेरा गुनाह तो मुझ पे लगाए गये तुम्हारे तमाम इल्मों और जुल्मो के मेरे जिस्म पे निशान जरुर देख लेना बेफिक्र रहो तुमसे बदला नही लुंगी न ही करूँगी कोई फरियाद क्योंकी कयामत के रोज हिसाब होगा तुमसे न कोई सवाल होंगा न कोई जवाब होगा होगी बस एक आखिरी मुलाकात ...

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