"एक सैनिक और माँ के बीच का वार्..." Poetry By Roshan Raj | Nojoto

एक सैनिक और माँ के बीच का वार्तालाप माँ - बेटा आज एक ठेकेदार आया था। छोटू को अपने साथ चलने को कह रहा था। मेरे बार-बार पूछने पर उसने कहा- माता तुम्हारा छोटू भारत माता की रक्षा और अपनी सभ्यता को बचाने जा रहा है। सैनिक- माँ क्यों जाने दिया छोटू को ? क्यों बनने दिया गीदड़ की टोली? शौर्यवान नहीं हूँ मैं अब क्या? माँ आज भी तिरंगा लहराता है वीर सैनिक भाइयों के साँसों से। आज भी सब हँस कर लिपट जाते हैं मान कफ़न तिरंगा को। लौटा लो छोटू को माँ- क्योंकि दुश्मन के बूलेट से ज्यादा पीड़ा ये ठेकेदार हमें दे जाते हैं। ( ठेकेदार- सभी जाती/समुदाय एवं धर्म के नाम पर संगठन चलाने वाले). Follow Roshan Raj. Download Nojoto App to get real time updates about Roshan Raj & be part of World's Largest Creative Community to share Writing, Poetry, Quotes, Art, Painting, Music, Singing, and Photography; A Creative expression platform. Poetry By Roshan Raj | Nojoto Poetry on Poetry. Poetry Poetry

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3 months ago

एक सैनिक और माँ के बीच का वार्तालाप

माँ - बेटा आज एक ठेकेदार आया था।
छोटू को अपने साथ चलने को कह रहा था।
मेरे बार-बार पूछने पर उसने कहा-
माता तुम्हारा छोटू भारत माता की रक्षा
और अपनी सभ्यता को बचाने जा रहा है।

सैनिक- माँ क्यों जाने दिया छोटू को ?
क्यों बनने दिया गीदड़ की टोली?
शौर्यवान नहीं हूँ मैं अब क्या?
माँ आज भी तिरंगा लहराता है
वीर सैनिक भाइयों के साँसों से।
आज भी सब हँस कर लिपट जाते हैं
मान कफ़न तिरंगा को।
लौटा लो छोटू को माँ-
क्योंकि दुश्मन के बूलेट से ज्यादा
पीड़ा ये ठेकेदार हमें दे जाते हैं।

( ठेकेदार- सभी जाती/समुदाय एवं धर्म के नाम पर संगठन चलाने वाले)

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Written By : Roshan Raj

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