ये जो अजीबो गरीब मुस्कान लबों पर छाती है, जैसे ओस | हिंदी शायरी

"ये जो अजीबो गरीब मुस्कान लबों पर छाती है, जैसे ओस की बूंदे सरद रातो को छु कर पिघलते है, कभि मिलों दुरिसे तुम्हारे आवाज जब कानों घुलती है, कभी तुम्हारे नाम जब कोई आस पास लेता है, कभी बा तुम्हारे यादें खाफी होते हैं, यूं तो लोग हमें पागल कभी कभी समझते हैं, के वजह जो हसनेकी पूछें हम बस शर हिलाते हैं, 😂😂😂🤣🤣🤣🤭🤭🤭 बड़ी अजीब हैं ये दिन, बड़े अजीब हैं ये पल, जो तुमसे दूर भी और करीब भी, हम खुदको हर पल पाते हैं।।"

ये जो अजीबो गरीब मुस्कान लबों पर छाती है,
जैसे ओस की बूंदे सरद रातो को छु कर पिघलते है,
कभि मिलों दुरिसे तुम्हारे आवाज जब कानों घुलती है,
कभी तुम्हारे नाम जब कोई आस पास लेता है,
कभी बा तुम्हारे यादें खाफी होते हैं,
यूं तो लोग हमें पागल कभी कभी समझते हैं,
के वजह जो हसनेकी पूछें हम बस शर हिलाते हैं,
😂😂😂🤣🤣🤣🤭🤭🤭
बड़ी अजीब हैं ये दिन,
बड़े अजीब हैं ये पल,
जो तुमसे दूर भी और करीब भी,
हम खुदको हर पल पाते हैं।।

ये जो अजीबो गरीब मुस्कान लबों पर छाती है, जैसे ओस की बूंदे सरद रातो को छु कर पिघलते है, कभि मिलों दुरिसे तुम्हारे आवाज जब कानों घुलती है, कभी तुम्हारे नाम जब कोई आस पास लेता है, कभी बा तुम्हारे यादें खाफी होते हैं, यूं तो लोग हमें पागल कभी कभी समझते हैं, के वजह जो हसनेकी पूछें हम बस शर हिलाते हैं, 😂😂😂🤣🤣🤣🤭🤭🤭 बड़ी अजीब हैं ये दिन, बड़े अजीब हैं ये पल, जो तुमसे दूर भी और करीब भी, हम खुदको हर पल पाते हैं।।

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