"इतनी छलकाई है महफ़िल में गुलाब..." Poetry By देवल कुमार | Nojoto

इतनी छलकाई है महफ़िल में गुलाबी उसने, जो भी आता है मदहोश हुआ जाता है ! कुछ तो रफ़्तार भी कछुए की तरह है अपनी, और कुछ वक़्त भी ख़रगोश हुआ जाता है !!. Follow देवल कुमार. Download Nojoto App to get real time updates about देवल कुमार & be part of World's Largest Creative Community to share Writing, Poetry, Quotes, Art, Painting, Music, Singing, and Photography; A Creative expression platform. Poetry By देवल कुमार | Nojoto Poetry on Poetry. Poetry Poetry

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3 months ago

इतनी छलकाई है महफ़िल में गुलाबी उसने,
जो भी आता है मदहोश हुआ जाता है !

कुछ तो रफ़्तार भी कछुए की तरह है अपनी,
और कुछ वक़्त भी ख़रगोश हुआ जाता है !!

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देवल कुमार

Written By : देवल कुमार

चांद को ढूँढे पागल सूरज, शाम को ढूँढे सवेरा मैं भी ढूँढूँ उस प्रीतम को, हो ना सका जो मेरा

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