कल जहां थे आज भी वहीं हैं, वही आसमा वही जमी है। | हिंदी Poem

"कल जहां थे आज भी वहीं हैं, वही आसमा वही जमी है। उड चले निगाहों से बचकर फिर भी, भूल कर, डोर थी उनके हाथ में अभी। पंख काट फिर वहीं लाया गया, अकेले होने का अहसास कराया गया।। Reenu"

कल जहां थे आज  भी वहीं हैं, 
वही आसमा वही जमी है। 
उड चले निगाहों से बचकर फिर भी, 
भूल कर, डोर थी उनके हाथ में अभी। 
पंख काट फिर वहीं लाया गया, 
अकेले होने का अहसास कराया गया।।

                       Reenu

कल जहां थे आज भी वहीं हैं, वही आसमा वही जमी है। उड चले निगाहों से बचकर फिर भी, भूल कर, डोर थी उनके हाथ में अभी। पंख काट फिर वहीं लाया गया, अकेले होने का अहसास कराया गया।। Reenu

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