भीड़" भेड़िये के झुण्ड की तरह हो रही हैं आये दिनों ये और भी हिं...

"भीड़" भेड़िये के झुण्ड की तरह हो रही हैं आये दिनों ये और भी हिंसक होती जा रही है...हम लिखने वालों की ज़िम्मेदारी है के सिंह की तरह अपनी कलम की दहाड़ से इंसानियत की पैरवी करें और इन 'भेड़ियाप्रवृत्ति की सोच' को जड़ ख़त्म करें...और ये काम यकीनन कलाएँ ही कर सकती हैं...

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