❣ हां हर रोज़ जिंदगी सिखाती है बहुत कुछ मैंने जिंद | हिंदी Poem

"❣ हां हर रोज़ जिंदगी सिखाती है बहुत कुछ मैंने जिंदगी से बहुत कुछ सीखा। मगर जो सबक आज मिला आज से पहले जीवन में वो कभी ना सीखा। जाना प्रेम का को मूल्य ,उसका अर्थ आज से पहले कभी जाना नहीं, दर्द में जिया हमेशा सच्चे सुख को पहचाना नहीं। आज जो पूर्णता मिली जीवन में,ऐसा पहले कभी नहीं देखा, जो बैठी आज शाम गंगा के तट पर, तो एक गंगा को स्वयं में बहते देखा। पावन प्रवाह, सुगंधित वायु से शरीर को पवित्र होते देखा, हां तुम्हारे प्रेम में मैंने स्वयं को गंगा बनते देखा। तुम्हारे प्रेम ने जो आज प्रेम का अर्थ बताया आज मैंने तन्मयता से सीखा, तुममें खुद को देखा मैंने, मुझमें तुमने खुद को देखा। प्रेम स्वार्थ ,मोह, छल, दिखावे मात्र से कहीं दूर मन को पवित्र कर देने वाला भाव है,तुम्हारे आने से आज जीवन में मैंने ये सीखा।__प्रतिभा💌❣ ___मेरी जिंदगी✍❤"

❣ हां हर रोज़ जिंदगी सिखाती है बहुत कुछ
मैंने जिंदगी से बहुत कुछ सीखा।
मगर जो सबक आज मिला आज से
पहले जीवन में वो कभी ना सीखा।
जाना प्रेम का को मूल्य ,उसका अर्थ
आज से पहले कभी जाना नहीं,
दर्द में जिया हमेशा सच्चे सुख को पहचाना नहीं।
आज जो पूर्णता मिली जीवन में,ऐसा पहले कभी नहीं देखा,
जो बैठी आज शाम गंगा के तट पर,
तो एक गंगा को स्वयं में बहते देखा।
पावन प्रवाह, सुगंधित वायु से शरीर को पवित्र होते देखा,
हां तुम्हारे प्रेम में मैंने स्वयं को गंगा बनते देखा।
तुम्हारे प्रेम ने जो आज प्रेम का अर्थ बताया आज मैंने तन्मयता से सीखा,
तुममें खुद को देखा मैंने, मुझमें तुमने खुद को देखा।
प्रेम स्वार्थ ,मोह, छल, दिखावे मात्र से कहीं दूर मन को पवित्र
कर देने वाला भाव है,तुम्हारे आने से आज जीवन में मैंने ये सीखा।__प्रतिभा💌❣
___मेरी जिंदगी✍❤

❣ हां हर रोज़ जिंदगी सिखाती है बहुत कुछ मैंने जिंदगी से बहुत कुछ सीखा। मगर जो सबक आज मिला आज से पहले जीवन में वो कभी ना सीखा। जाना प्रेम का को मूल्य ,उसका अर्थ आज से पहले कभी जाना नहीं, दर्द में जिया हमेशा सच्चे सुख को पहचाना नहीं। आज जो पूर्णता मिली जीवन में,ऐसा पहले कभी नहीं देखा, जो बैठी आज शाम गंगा के तट पर, तो एक गंगा को स्वयं में बहते देखा। पावन प्रवाह, सुगंधित वायु से शरीर को पवित्र होते देखा, हां तुम्हारे प्रेम में मैंने स्वयं को गंगा बनते देखा। तुम्हारे प्रेम ने जो आज प्रेम का अर्थ बताया आज मैंने तन्मयता से सीखा, तुममें खुद को देखा मैंने, मुझमें तुमने खुद को देखा। प्रेम स्वार्थ ,मोह, छल, दिखावे मात्र से कहीं दूर मन को पवित्र कर देने वाला भाव है,तुम्हारे आने से आज जीवन में मैंने ये सीखा।__प्रतिभा💌❣ ___मेरी जिंदगी✍❤

ऐसा लगा अभी देखकर ये टॉपिक आज मेरे लिखने के लिए ईश्वर ने स्पेशली बनाया है।
बहुत बहुत धन्यवाद प्रभु आपका🙏🙏
🌹जय श्री हरि🌹
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