राफ़ेल रिलायंस का संयुक्त उद्यम: ओलांद, भृष्ट मीडिय

राफ़ेल रिलायंस का संयुक्त उद्यम: ओलांद, भृष्ट मीडिया, कांग्रेस व रूस का षणयंत्र
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कल भारत की मीडिया ने एक भूचाल को जन्म दिया है। प्रेस्टिट्यूएस मीडिया के नाम से कुख्यात 'द वायर', 'द प्रिंट', 'एनडीटीवी' में एक साथ यह खबर आई कि फ्रांस के भूतपूर्व राष्ट्रपति ओलांद ने एक इंटरव्यू में यह खुलासा किया है की राफ़ेल डील में इस युद्धक विमान के कल पुर्जे बनाने के लिये, भारत सरकार ने रिलाइंस का नाम दिया था।

इस ब्रेकिंग न्यूज़ का असर यह हुआ कि मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर लोगो ने वर्तमान की भारतीय सरकार, विशेषतः मोदी जी पर व्यक्तिगत रूप से 'राफ़ेल घोटाला' का नाम लेकर भृष्टाचार का आरोप लगा दिया है।

कल जब यह विस्फोट हुआ था तब मुझको देख कर कोई भी आश्चर्य नही हुआ थी कि इस खबर को जिन लोगों ने बढ़ाया है और उनकी देखा देखी, जो और लोग कूद पड़े है उन किसी ने इस समाचार की हेडलाइंस से ज्यादा जाकर कुछ भी अन्वेषण नही किया था। इस सबको देख कर मेरा विश्वास और भी सुद्रढ़ हो गया थी कि राफ़ेल सौदे को लेकर जो आग लगाई गई उसके पीछे का सच जरूर कुछ और होगा क्योंकि इसको लेकर उड़ा भ्रष्ट्र राजनैतिक समुदाय, जिसकी अगुवाई 5000 करोड़ के नेशनल हेराल्ड घोटाले में जमानत में बाहर निकले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और एनडीटीवी व शेखर गुप्ता कर रहे है।

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