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कोई ज़माना था जब हमारे घर मे, भी किताबों के ढेर पड़े

कोई ज़माना था जब हमारे घर मे,
भी किताबों के ढेर पड़े रहते थे,
संभाल के रखो इक जगह अपने कमरों मे,
हमसे हमारे मम्मी-पापा कहते थे,
लेकिन तब उनकी बातो कि कदर ना कि,
और अब वो बाते मुझे याद आती है,
मुझे फिर से स्कूल मे जाना है क्यों कि आज भी, 
मुझे उन नयी किताबों से आती महक सताती है...

#Haibowaliya #किताबें #Haibowaliya #nojotoludhiana
कोई ज़माना था जब हमारे घर मे,
भी किताबों के ढेर पड़े रहते थे,
संभाल के रखो इक जगह अपने कमरों मे,
हमसे हमारे मम्मी-पापा कहते थे,
लेकिन तब उनकी बातो कि कदर ना कि,
और अब वो बाते मुझे याद आती है,
मुझे फिर से स्कूल मे जाना है क्यों कि आज भी, 
मुझे उन नयी किताबों से आती महक सताती है...

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