मुझे डर लग रहा था, वो बदलने लगा था, मेरा सूरज किस | हिंदी Poem

"मुझे डर लग रहा था, वो बदलने लगा था, मेरा सूरज किसी और शाम की आगोश में ढलने लगा था....! मुझे लगा था, वो जा रहा है , वापस दौड कर आएगा,मेरे गले लग जाएगा, पर मुझे मालूम न था कि वो मुझे छोडकर, किसी और मंजिल की तरफ बढने लगा था......!!"

मुझे डर लग रहा था, वो बदलने लगा था,

मेरा सूरज किसी और शाम की आगोश में ढलने लगा था....!

मुझे लगा था, वो जा रहा है , 
वापस दौड कर आएगा,मेरे गले लग जाएगा,

पर मुझे मालूम न था कि वो मुझे छोडकर,
किसी और मंजिल की तरफ बढने लगा था......!!

मुझे डर लग रहा था, वो बदलने लगा था, मेरा सूरज किसी और शाम की आगोश में ढलने लगा था....! मुझे लगा था, वो जा रहा है , वापस दौड कर आएगा,मेरे गले लग जाएगा, पर मुझे मालूम न था कि वो मुझे छोडकर, किसी और मंजिल की तरफ बढने लगा था......!!

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वो बदलने लगा था

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