"हैरत है कि मेरा कोई ख़ता न ..." Poetry By राजेन्द्र प्र०पासवान | Nojoto

हैरत है कि मेरा कोई ख़ता न था फिर भी वह फासले बढ़ा कर गई । #बज़्म होगी वह किसी सहर की ग़ज़ल ख़्वाब से मुझको जगाकर गई । #क़लम_ए_ख़ास साहस न था कि अत्यधिक लिखूँ आस का दीया कोई जलाने लगी । #शब्द_खेल जाग उठा निर्जीव वाद्य यंत्र भी ज़िन्दगी जब राग सुनाने लगी । #dpf. Follow राजेन्द्र प्र०पासवान . Download Nojoto App to get real time updates about राजेन्द्र प्र०पासवान & be part of World's Largest Creative Community to share Writing, Poetry, Quotes, Art, Painting, Music, Singing, and Photography; A Creative expression platform. Poetry By राजेन्द्र प्र०पासवान | Nojoto Poetry on Poetry, dpf, क़लम_ए_ख़ास, बज़्म, शब्द_खेल. Poetry Poetry, dpf Poetry, क़लम_ए_ख़ास Poetry, बज़्म Poetry, शब्द_खेल Poetry

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3 months ago

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राजेन्द्र प्र०पासवान

Written By : राजेन्द्र प्र०पासवान

नमस्ते , खग की भाषा खग समझे /जो इश्क़ न किया वो क्या समझे

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