अर्श की कविता 【दाऊ】 खाटू सा मैं, बलराम सा वो समग्र | हिंदी Video

"अर्श की कविता 【दाऊ】"

अर्श की कविता 【दाऊ】

खाटू सा मैं, बलराम सा वो
समग्र चाहतें पूरी कर दे
ऐसा हीं था, बलवान था वो ।।

चल पड़ा जब, जीवन पथ पर
चढ़ती यमुना को चीरे
तक्षक का वो रूप धरे था
सपनें बुनता मैं, उसके नीचे

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