मैं मेरे सपनों का कैदी हूँ फिर भी। मेरी ख्वाहिशें | हिंदी शायरी

"मैं मेरे सपनों का कैदी हूँ फिर भी। मेरी ख्वाहिशें मुझे सोने नहीं देती... गजब का नशा हैं मुझ पर मेरी मंजिल का इतनी बार हारने पर भी मुझे हार मानने नहीं देती... कवि चंचल शर्मा✍️"

मैं मेरे सपनों का कैदी हूँ फिर भी।
मेरी ख्वाहिशें मुझे सोने नहीं देती...
गजब का नशा हैं मुझ पर मेरी मंजिल का
इतनी बार हारने पर भी मुझे हार मानने नहीं देती...
                                                      कवि चंचल शर्मा✍️

मैं मेरे सपनों का कैदी हूँ फिर भी। मेरी ख्वाहिशें मुझे सोने नहीं देती... गजब का नशा हैं मुझ पर मेरी मंजिल का इतनी बार हारने पर भी मुझे हार मानने नहीं देती... कवि चंचल शर्मा✍️

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