दिल टूटने के बाद जुड़ जाता है, शीशा नही है ये, जो च | हिंदी Poem

"दिल टूटने के बाद जुड़ जाता है, शीशा नही है ये, जो चुभ जाता है, जिसे दर्द होता है, वो दूसरो का दर्द भी समझता है, यूँही नही! हर कोई किसी खास पर मरता है, वहम है ये, की दिल टूटने के बाद बिखर जाता है, ए-शिवि दिल टूटने के बाद इन्सान निखर जाता है। #$hivi"

दिल टूटने के बाद जुड़ जाता है,
शीशा नही है ये, जो चुभ जाता है,

जिसे दर्द होता है, वो दूसरो का दर्द भी समझता है,
यूँही नही! हर कोई किसी खास पर मरता है,

वहम है ये, की दिल टूटने के बाद बिखर जाता है,
ए-शिवि दिल टूटने के बाद इन्सान निखर जाता है।

            #$hivi

दिल टूटने के बाद जुड़ जाता है, शीशा नही है ये, जो चुभ जाता है, जिसे दर्द होता है, वो दूसरो का दर्द भी समझता है, यूँही नही! हर कोई किसी खास पर मरता है, वहम है ये, की दिल टूटने के बाद बिखर जाता है, ए-शिवि दिल टूटने के बाद इन्सान निखर जाता है। #$hivi

#brokenheart






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