पूजा देवी समान बेटी वो आज, शर्म न आयी तुझे, क

"पूजा देवी समान बेटी वो आज, शर्म न आयी तुझे, करते यह हीन काज, बेटी अभी सयानी थी, उसको क्या पता उसके इस नाजुक बदन पर, यह क़यामत आनी थी, रोती वो न अकेली, उसका परिवार रोया था, बेटी ने आज अपना जिस्म जो खोया था, हाँ, वे पुरुष कहलाने के हकदार नहीं, सजा मिले कोई दमदार नयी, फाँसी हो या उम्रकैद उससे क्या फर्क पड़ता हैं, क्या इससे बेटी का जिस्म सँवरता हैं। Special writing for a girl child... ❤🙏"

पूजा  
 
देवी समान बेटी वो आज, 
शर्म न आयी तुझे, करते यह हीन काज, 
बेटी अभी सयानी थी, 
उसको क्या पता  उसके इस नाजुक बदन पर, 
यह क़यामत आनी थी, 
रोती वो न अकेली, उसका परिवार रोया था, 
बेटी ने आज अपना जिस्म जो खोया था, 
हाँ, वे पुरुष कहलाने के हकदार नहीं, 
सजा मिले कोई दमदार नयी, 
फाँसी हो या उम्रकैद उससे क्या फर्क पड़ता हैं, 
क्या इससे बेटी का जिस्म सँवरता हैं। 
Special writing for a girl child... ❤🙏

पूजा देवी समान बेटी वो आज, शर्म न आयी तुझे, करते यह हीन काज, बेटी अभी सयानी थी, उसको क्या पता उसके इस नाजुक बदन पर, यह क़यामत आनी थी, रोती वो न अकेली, उसका परिवार रोया था, बेटी ने आज अपना जिस्म जो खोया था, हाँ, वे पुरुष कहलाने के हकदार नहीं, सजा मिले कोई दमदार नयी, फाँसी हो या उम्रकैद उससे क्या फर्क पड़ता हैं, क्या इससे बेटी का जिस्म सँवरता हैं। Special writing for a girl child... ❤🙏

#GirlChild#Poetry

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