ये सुर्ख़ लब, ये रुख़सार, और मदहोश नज़रे, इतने कम फ़ास | हिंदी शायरी

"ये सुर्ख़ लब, ये रुख़सार, और मदहोश नज़रे, इतने कम फ़ासलों में तो सिर्फ मयख़ाने होते हैं।"

ये सुर्ख़ लब,
ये रुख़सार,
और मदहोश नज़रे,
इतने कम फ़ासलों में तो सिर्फ मयख़ाने होते हैं।

ये सुर्ख़ लब, ये रुख़सार, और मदहोश नज़रे, इतने कम फ़ासलों में तो सिर्फ मयख़ाने होते हैं।

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